
भोपाल: महिला सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर की भाषा पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले की निगरानी वह स्वयं करेगा और कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एफआईआर ऐसे कंटेंट के साथ लिखी गई है, जो चुनौती देने पर निरस्त हो जाए।
जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा, “एफआईआर ऐसे कंटेंट के साथ लिखी गयी है, जो चुनौती देने पर निरस्त हो जाये।” कोर्ट ने आदेश में उल्लेखित कंटेंट के बारे में बताते हुए एफआईआर में संशोधन करने और उचित तरीके से दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एफआईआर की भाषा, लगाई गई धाराओं और इसे दर्ज करने के तरीके पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में आरोपी के अपराध का स्पष्ट जिक्र नहीं है और ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी के हितों को ध्यान में रखते हुए इसे तैयार किया गया है।कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा, “यह उल्लेख करना आवश्यक है कि कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ, मीडिया और राष्ट्र को पाकिस्तान के खिलाफ हमारे सशस्त्र बलों द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की प्रगति के बारे में जानकारी देने वाले सशस्त्र बलों का चेहरा थीं।”
युगलपीठ ने मंत्री के बयान की आलोचना करते हुए कहा, “मंत्री ने कर्नल सोफिया कुरैशी को पहलगाम में 26 निर्दोष भारतीयों की हत्या करने वाले आतंकवादियों की बहन बताया है। उन्होंने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आतंकवादियों की बहन को उन्हें सुलझाने के लिए भेजने की बात कही है। उनकी यह टिप्पणी संबंधित अधिकारी के लिए नहीं बल्कि सशस्त्र बलों के लिए भी अपमानजनक और खतरनाक है।”कोर्ट ने आगे कहा कि मंत्री का बयान “प्रथम दृष्टया मुस्लिम धर्म के सदस्यों और अन्य व्यक्तियों के बीच वैमनस्य और दुश्मनी या घृणा या दुर्भावना पैदा करने की प्रवृत्ति वाला है।”
युगलपीठ ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को निर्देशित किया है कि गुरुवार शाम तक आवश्यक रूप से आदेशानुसार एफआईआर दर्ज करें। साथ ही चेतावनी दी कि आदेश का पालन न होने पर अवमानना के लिए कार्यवाही की जा सकती है।
इससे पहले हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए मंत्री के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएस) की धारा 152, 196(1)(बी) और 197(1)(सी) के अंतर्गत तत्काल एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किये थे।महाधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ मानपुर थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है, लेकिन युगलपीठ ने इस एफआईआर का अवलोकन करने पर गंभीर कमियां पाईं।
महाधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि राज्य की मंशा पर शक न किया जाए और कोर्ट के आदेशों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने सुनवाई के दौरान एफआईआर पढ़कर भी सुनाई।इस पर कोर्ट ने कहा, “ये कोई मर्डर का केस नहीं है। यहां पर किसी व्यक्ति ने क्या कहा है? इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। कोर्ट ने जो संज्ञान लिया है इसके बारे में कोई जानकारी एफआईआर में नहीं दी गई है। अपराध के बारे में कोई जानकारी नहीं है।”
मंत्री विजय शाह के मामले में बुधवार को हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे “कैंसर जैसा घातक” बताया था। कोर्ट ने कहा था कि मंत्री शाह ने “गटर छाप भाषा” का इस्तेमाल किया है, जो अस्वीकार्य है।विजय शाह गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की शरण में भी पहुंचे और एफआईआर पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन यहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा, “आप संवैधानिक पद पर हैं और आपको अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। एक मंत्री होकर आप किस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।”