
उत्तराखंड में यात्रियों की सुरक्षा के मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है। फायर ब्रिगेड द्वारा आयोजित प्रशिक्षण के दौरान पता चला कि राज्य परिवहन निगम की कई बसें—विशेष रूप से CNG और वॉल्वो—बिना फायर सिलिंडर के ही रूट पर संचालित हो रही थीं। इससे न केवल सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन हो रहा था, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में बड़ा हादसा होने की आशंका भी बनी रहती है।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान यह भी सामने आया कि कई बस चालकों को फायर सिलिंडर का सही उपयोग तक करना नहीं आता। यह स्थिति यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही को दर्शाती है, क्योंकि आपातकाल में चालक की तत्परता और प्रशिक्षण बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जानकारी सामने आने के बाद रोडवेज मुख्यालय ने सभी डिपो प्रबंधकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश दिया गया है कि:
कोई भी बस बिना फायर सिलिंडर के रूट पर नहीं भेजी जाएगी।
चालकों व परिचालकों को फायर सेफ्टी का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बसों की सुरक्षा मानकों की नियमित जांच की जाएगी।
फायर ट्रेनिंग के दौरान मिली इन कमियों ने रोडवेज की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसी लापरवाही जारी रही, तो किसी भी दुर्घटना में बड़े नुकसान से इंकार नहीं किया जा सकता।
यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब निगरानी बढ़ाए जाने और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।