
बदरीनाथ धाम, 22 नवंबर: बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की वार्षिक प्रक्रिया के तहत पंचपूजाएं शुक्रवार से प्रारंभ हो गई हैं। परंपरा के अनुसार दूसरे दिन शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ आदिकेदारेश्वर मंदिर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
आदिकेदारेश्वर मंदिर में भोग के बाद रावल अमरनाथ नंबूदरी ने अन्नकूट का भोग अर्पित किया। शिवलिंग को पके चावलों से ढकने के उपरांत दोपहर 2 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। इसके बाद 2:15 बजे आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट भी शीतकाल हेतु बंद कर दिए गए।
बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। कपाट बंद होने के बाद शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित किया जाएगा।
कपाट बंद होने की प्रक्रिया में रावल अमरनाथ नंबूदरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, प्रभारी धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट, अमित बंदोलिया सहित मंदिर के पुजारीगण मौजूद रहे। बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी/कार्यपालक मजिस्ट्रेट विजय प्रसाद थपलियाल, पूर्व अपर धर्माधिकारी सत्यप्रकाश चमोला, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, नगर पंचायत ईओ सुनील पुरोहित, थाना प्रभारी नवनीत भंडारी, प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप भट्ट सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ के अनुसार, पंचपूजा के तीसरे दिन 23 नवंबर को पूजा के बाद वेद ऋचाओं का वाचन बंद होगा। चौथे दिन 24 नवंबर को माता लक्ष्मी को आमंत्रण दिया जाएगा।
25 नवंबर को अपराह्न 2:56 बजे बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल हेतु औपचारिक रूप से बंद कर दिए जाएंगे।