उत्तराखंडदेहरादून

देहरादून में हिमालयी आपदाओं पर विशेषज्ञों का मंथन, वृक्षाबंधन अभियान ने आयोजित की विमर्श श्रृंखला

देहरादून, 22 नवंबर 2025 हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती आपदाओं के अध्ययन और प्रभावी समाधान तलाशने के उद्देश्य से वृक्षाबंधन अभियान (पंजी.) द्वारा बीजापुर राज्य अतिथि गृह, देहरादून में विमर्श श्रृंखला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रतिष्ठित पर्यावरण विशेषज्ञों, समाजसेवियों, सैन्य अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

द्वितीय सत्र के प्रमुख वक्ताओं में मेजर जनरल कुंवर दिग्विजय सिंह (से.नि.), लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. देव प्रसाद डिमरी (से.नि.), सैनिक शिरोमणि मनोज ध्यानी, पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, मेजर महाबीर सिंह रावत (से.नि.), पर्यावरणविद अवधेश शर्मा, इंजीनियर सुरेश चंद्र पंत, पत्रकार अश्विनी मेंदोला, अभय कुमार, पुनीत नंदा, आशीष कालरा, प्रो. प्रवीण कुमार, अनिता शास्त्री और संजय कुमार शामिल रहे।

विमर्श का विषय

“हिमालयी आपदाओं पर मानव गतिविधियों का प्रभाव—क्या जोखिमों को कम किया जा सकता है? जोखिम घटाने संबंधी उपायों में आने वाली बाधाएँ एवं चुनौतियाँ।”

मुख्य बिंदु व सुझाव

मेजर जनरल कुंवर दिग्विजय सिंह (से.नि.) ने हिमालयी भूगोल की समझ विकसित करने हेतु प्रशासनिक ढांचे को पहाड़ों के अनुकूल बनाने और बड़े पैमाने पर वाणिकीकरण (Afforestation) को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने पर्यावरण शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का सुझाव भी दिया।

अवधेश शर्मा ने लैंटाना, गाजर घास और अन्य आक्रामक प्रजातियों से हिमालय को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने seed library, जंगल की पाठशाला जैसे अपने प्रयासों का उल्लेख किया।

डॉ. देव प्रसाद डिमरी (से.नि.) ने गुप्तकाशी क्षेत्र में बहुमंजिला निर्माण जैसी परियोजनाओं को हिमालय पर अनावश्यक दबाव बताकर विस्तृत प्रस्तुति दी।

मनोज ध्यानी, अध्यक्ष—वृक्षाबंधन अभियान, ने अत्यधिक वर्षा, गिरते जलस्तर, विसर्जन परंपराओं और पर्यटन-तीर्थाटन मिश्रण से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने भौंरों, तितलियों व पक्षियों की पारिस्थितिकी में भूमिका पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।

इंजीनियर सुरेश चंद्र पंत ने हिमालय में concentrated settlement को आपदाओं का बड़ा कारण बताते हुए सड़क निर्माण में हो रही खामियों और बदलते रोड-अलाइनमेंट के गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव साझा किए।

मेजर महाबीर सिंह रावत (से.नि.) ने धाद संस्था की स्मृति वन, बाल वन तथा हरेला पर्व जैसी गतिविधियों को प्रभावी पहल बताया।

पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने 200 से अधिक बुग्यालों में बढ़ती मानवीय गतिविधियों पर चिंता जताई। उन्होंने ब्रह्मकमल सहित संवेदनशील प्रजातियों के संरक्षण और हिमालय में दोहन नीति की समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

आशीष कालरा ने eco-friendly construction तकनीकों के उपयोग पर जोर देते हुए hollow concrete bricks से भवनों के भार में कमी लाने के उदाहरण साझा किए।

अनिता शास्त्री ने हिमालयी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन और इससे भूमि व जल स्रोतों को हो रहे नुकसान को बड़ी चुनौती बताया।

अन्य प्रतिभागियों—प्रो. प्रवीण कुमार, पुनीत नंदा, पत्रकार अभय कुमार और संजय कुमार—ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मेजर जनरल कुंवर दिग्विजय सिंह (से.नि.) और संचालन मनोज ध्यानी, अध्यक्ष—वृक्षाबंधन अभियान, ने किया।

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