New Delhi

भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 में उत्तराखंड दिवस की शानदार चमक

नई दिल्ली: भारत मंडपम में चल रहे भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 के दौरान आयोजित 44वें उत्तराखंड दिवस समारोह ने राज्य के पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा और सांस्कृतिक विरासत को देश–विदेश के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। आयोजन ने उत्तराखंड की पहचान, सृजनात्मकता और स्थानीय उद्यमों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी उत्तराखंडी उत्पादों की मांग

मेले में आए अंतरराष्ट्रीय और देशी आगंतुकों ने उत्तराखंड के स्वदेशी हस्तशिल्प और बुनकरी उत्पादों की गुणवत्ता की खुलकर सराहना की। बड़ी संख्या में मिले अग्रिम ऑर्डरों ने राज्य के कारीगरों और बुनकरों में नया उत्साह भरा है। यह उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत मिशन के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि इस वर्ष व्यापार मेले में लगभग 1 करोड़ रुपये के उत्तराखंडी हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को बाज़ार मिला है। उन्होंने इसे राज्य के शिल्पकारों, कारीगरों और बुनकरों की मेहनत, गुणवत्ता और परंपरा की बड़ी उपलब्धि करार दिया।

वीरेंद्र दत्त सेमवाल की महत्वपूर्ण भूमिका

हथकरघा और हस्तशिल्प को राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में अहम योगदान देने वाले वीरेंद्र दत्त सेमवाल ने उत्तराखंड मंडप में आगंतुकों को स्थानीय उत्पादों की विशेषताओं, पारंपरिक कारीगरी और राज्य के स्वदेशी कौशल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह मंच उत्तराखंड के शिल्पकारों के लिए वैश्विक पहचान बनाने का बड़ा अवसर है।

गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

आयोजन में कई प्रमुख हस्तियां शामिल रहीं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, उद्योग विभाग के कमिश्नर विनय शंकर पांडे, सिडकुल के प्रबंध निदेशक सौरभ गहरवाल और उद्योग निदेशक महावीर सजवान सहित अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद थे।

वैश्विक मंच पर उत्तराखंड की पहचान

44वां उत्तराखंड दिवस समारोह राज्य की कला परंपरा, बुनकरी और स्वदेशी कौशल को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है। यह आयोजन उत्तराखंड की सांस्कृतिक समृद्धि को नई पीढ़ी और नए बाजारों से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को सशक्त बनाता है।

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