उत्तराखंडदेहरादून

अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े आरोपों की कवरेज पर उठे गंभीर सवाल, चयनात्मक कार्रवाई के आरोप

देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े आरोपों को लेकर अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा हाल के दिनों में लगाए गए बयानों और पुराने मामलों की मीडिया कवरेज अब एक नए विवाद का कारण बन गई है। सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में यह चर्चा तेज है कि इस मामले से जुड़े वीडियो और कंटेंट चलाने वाले कुछ यूट्यूबर्स और छोटे डिजिटल चैनलों को “क्रिमिनल एक्टिविटी” की श्रेणी में रखकर उनके खिलाफ कार्रवाई या जांच की बात कही जा रही है।

जानकारी के अनुसार, जिन कंटेंट क्रिएटर्स और चैनलों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें अधिकांश छोटे या क्षेत्रीय यूट्यूब चैनल और व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट शामिल हैं। आरोप है कि इन लोगों को मामले से जुड़े वीडियो चलाने के एवज में कथित तौर पर अवैध गतिविधियों से जुड़ा लाभ या “इनाम” मिला है। इसी आधार पर इनके खिलाफ जांच या कार्रवाई की बात कही जा रही है।

हालांकि, इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अंकिता भंडारी हत्याकांड और उससे जुड़े आरोपों को लेकर यही सामग्री और बयान कई राष्ट्रीय और बड़े समाचार चैनलों पर भी प्रसारित किए गए थे। इसके बावजूद अब तक किसी भी बड़ी मीडिया संस्था या प्रमुख न्यूज चैनल का नाम इस तरह की सूचियों या आरोपों में सामने नहीं आया है। इससे कार्रवाई की निष्पक्षता और चयनात्मक रवैये पर सवाल उठने लगे हैं।

मीडिया और सोशल मीडिया पर यह भी बहस चल रही है कि यदि किसी कंटेंट को भ्रामक, आपत्तिजनक या कानून के विरुद्ध माना जा रहा है, तो फिर उसके प्रसारण के लिए जिम्मेदारी तय करने में सभी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान मापदंड क्यों नहीं अपनाया जा रहा। केवल छोटे चैनलों और यूट्यूबर्स को ही निशाना बनाए जाने से यह संदेश जा रहा है कि कार्रवाई समान नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां सोशल मीडिया के दुरुपयोग, भड़काऊ कंटेंट, ब्लैकमेलिंग और कथित आपराधिक गतिविधियों से जुड़े हर पहलू को खंगालने की बात कर रही हैं। वहीं, पत्रकार संगठनों और डिजिटल मीडिया से जुड़े लोगों का कहना है कि कानून का पालन जरूरी है, लेकिन कार्रवाई पारदर्शी, तथ्य आधारित और सभी के लिए समान होनी चाहिए।

फिलहाल यह मामला मीडिया की भूमिका, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के दायरे में जिम्मेदारी जैसे अहम सवालों को सामने ला रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियां और प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या बड़ी मीडिया संस्थाओं की भूमिका की भी समान रूप से समीक्षा की जाती है या नहीं।

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