उत्तराखंडदेहरादून

दुष्यंत गौतम ने लगाए आपराधिक साजिश के आरोप, 47 सोशल मीडिया चैनलों पर रोक लगाने की मांग

देहरादून: भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम ने अपने विरुद्ध कथित रूप से चलाए जा रहे भ्रामक और आपराधिक अभियान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सनावर द्वारा लगाए गए आरोपों के बीच पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इसे सुनियोजित आपराधिक साजिश करार दिया है।

दुष्यंत गौतम ने गृह सचिव को पत्र भेजकर इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। गुरुवार को भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा उनके खिलाफ फर्जी ऑडियो और भ्रामक सामग्री तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य उनकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है। यह सामग्री सोशल मीडिया और कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार प्रसारित की जा रही है।

पत्र में दुष्यंत गौतम ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा मामला एक संगठित साजिश का हिस्सा है, जिसके तहत उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अभियान में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग किया जा रहा है।

दुष्यंत गौतम ने गृह सचिव को 47 सोशल मीडिया हैंडल्स की सूची भी सौंपी है। इस सूची में फेसबुक आईडी, इंस्टाग्राम हैंडल, यूट्यूब चैनल और ट्विटर (एक्स) अकाउंट शामिल बताए गए हैं। उनका कहना है कि इन अकाउंट्स और चैनलों के माध्यम से लगातार उनकी मानहानि की जा रही है और झूठी, तथ्यहीन सामग्री प्रसारित की जा रही है।

उन्होंने मांग की है कि इन सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स से आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री को तत्काल हटाया जाए। साथ ही संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और समाचार चैनलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि इस प्रकार की सामग्री का आगे प्रसार रोका जा सके।

दुष्यंत गौतम ने यह भी कहा है कि यदि समय रहते इस तरह की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे न केवल व्यक्ति विशेष की छवि को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि समाज में भ्रम और अविश्वास का माहौल भी बनेगा। उन्होंने गृह विभाग से इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

फिलहाल इस पत्र के बाद राजनीतिक और मीडिया जगत में हलचल तेज हो गई है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि गृह विभाग और जांच एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं और सोशल मीडिया पर चल रहे कथित भ्रामक अभियानों पर किस तरह की कार्रवाई होती है।

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