Jammu & Kashmir

Jammu Kashmir News: बंदूकों के साथ तैयार बंकर! चिनाब घाटी में ग्रामीणों और महिलाओं को ‘योद्धा’ बना रही है भारतीय सेना

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए भारतीय सेना ने एक बड़ी पहल की है। चिनाब घाटी (Chenab Valley) के ऊपरी इलाकों में विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDGs), जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं, को हथियार चलाने और बंकर बनाने की स्पेशल ट्रेनिंग दी जा रही है।

नई दिल्ली/श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की कमर तोड़ने के लिए भारतीय सेना (Indian Army) ने अब स्थानीय लोगों को सुरक्षा का अहम हिस्सा बनाने की रणनीति पर काम तेज कर दिया है। चिनाब घाटी के ऊपरी इलाकों में जारी व्यापक आतंकवाद विरोधी अभियानों के बीच, सेना ने डोडा जिले में विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDG) को विशेष प्रशिक्षण देना शुरू किया है।

अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य स्थानीय स्वयंसेवकों (Volunteers) को अपने गांवों की रक्षा करने और संवेदनशील इलाकों में ‘फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस’ (सुरक्षा की पहली पंक्ति) के रूप में कार्य करने के लिए तैयार करना है।

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए भारतीय सेना ने एक बड़ी पहल की है। चिनाब घाटी (Chenab Valley) के ऊपरी इलाकों में विलेज डिफेंस गार्ड्स (VDGs), जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं, को हथियार चलाने और बंकर बनाने की स्पेशल ट्रेनिंग दी जा रही है। PHOTO SOURCE; TOI

डोडा-चंबा बॉर्डर पर ग्रामीणों को स्पेशल ट्रेनिंग

सेना के अधिकारियों ने बताया कि डोडा-चंबा सीमा पर स्थित 17 दूरदराज के गांवों के लगभग 150 VDG सदस्य इस समय ट्रेनिंग ले रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि इन स्वयंसेवकों में महिलाएं भी शामिल हैं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डोडा जिला मुख्यालय से लगभग 90 किमी दूर भलेसा (Bhalessa) क्षेत्र की शिंगिनी पंचायत में आयोजित किया जा रहा है।

इस ट्रेनिंग में क्या सिखाया जा रहा है?

  • ऑटोमैटिक हथियारों (Automatic Weapons) को चलाना।

  • बुनियादी रणनीतिक युद्धाभ्यास (Basic Tactical Manoeuvres)।

  • आत्मरक्षा (Self-defence) के गुर।

  • बंकर निर्माण (Bunker Construction)।

  • दुश्मन के हमलों को विफल करने के तरीके।

.303 की जगह मिलीं SLR, ग्रामीणों का बढ़ा जोश

VDG सदस्यों ने ट्रेनिंग और हथियारों के अपग्रेडेशन का स्वागत किया है। कई स्वयंसेवकों ने पुरानी .303 राइफलों की जगह सेल्फ-लोडिंग राइफल्स (SLRs) उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि आधुनिक हथियारों से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है।

शिंगिनी के एक VDG सदस्य, सुरिंदर सिंह ने कहा, “यह एक बड़ी पहल है जो 17 विलेज डिफेंस समूहों के सदस्यों को एक साथ ला रही है। हमें हथियार चलाने, बंकर बनाने और आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी जा रही है। हमारे घर के दरवाजे पर ऐसा प्रशिक्षण मिलना बेहद उत्साहजनक है।” उन्होंने 1990 के दशक की शुरुआत में क्षेत्र में हुए आतंकी हमलों को याद करते हुए सरकार से और अधिक स्वचालित हथियार उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया।

चिल्लाई कलां और ‘विंटर पोस्चर’ (Winter Posture)

यह ट्रेनिंग ऐसे समय में हो रही है जब घाटी में ‘चिल्लाई कलां’ (40 दिनों की कड़ाके की ठंड) का दौर चल रहा है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, जम्मू क्षेत्र में अभी भी लगभग 30 से 35 पाकिस्तानी आतंकवादी मौजूद हो सकते हैं।

माना जा रहा है कि सुरक्षा बलों के सफल ऑपरेशनों से घबराकर ये आतंकी अब ऊपरी और मध्य पहाड़ी इलाकों में छिपने की कोशिश कर रहे हैं, जहां आबादी नहीं है। इसे देखते हुए, सेना और सुरक्षा बलों ने एक आक्रामक ‘विंटर पोस्चर’ अपनाया है, जिसके तहत बर्फ से ढके क्षेत्रों में अस्थायी बेस और निगरानी पोस्ट बनाए गए हैं ताकि आतंकियों को सर्दियों में छिपने का मौका न मिले।

‘अब हम अपने गांवों की रक्षा करने में सक्षम हैं’

गौआला गांव के एक अन्य स्वयंसेवक, राजेश कुमार ठाकुर ने कहा कि सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा दी गई ट्रेनिंग ने VDG सदस्यों का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने कहा, “पहले हमारे पास केवल .303 राइफलें थीं। ऑटोमैटिक हथियार मिलने से हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है और हम अपने गांवों की रक्षा के लिए बेहतर महसूस कर रहे हैं।”

ठाकुर ने यह भी मांग की कि अवैतनिक VDG सदस्यों को मानदेय (Honorarium) दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गांवों में बंकरों के निर्माण से निवासियों के बीच डर कम करने में मदद मिली है।

सुरक्षा की बहुस्तरीय रणनीति

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि ऊपरी इलाकों में लगातार आतंकवाद विरोधी अभियानों के साथ-साथ VDGs को मजबूत करना एक बहुस्तरीय सुरक्षा रणनीति (Multi-layered security strategy) का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य आतंकवादी समूहों को किसी भी तरह के स्थानीय समर्थन से वंचित करना और क्षेत्र में स्थायी शांति सुनिश्चित करना है।

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