
देहरादून | 30 दिसंबर 2025: हिमालय केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि सहनशक्ति की कसौटी है। वर्ष 2025 में उत्तराखंड ने इस कसौटी को स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर पूरी मजबूती से पार किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था ने चारधाम यात्रा और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान असाधारण सेवा देकर नया मानक स्थापित किया।
वर्ष 2025 उत्तराखंड के लिए केवल एक कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस चालकों और फील्ड कर्मियों के समर्पण का प्रतीक बनकर ‘हेल्थ हीरो ईयर’ के रूप में दर्ज हुआ।
चारधाम यात्रा में स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत कवच
चारधाम यात्रा 2025 के दौरान 47 लाख से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री पहुंचे। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती थी। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने यात्रा से पहले ही व्यापक रणनीति लागू की।
यात्रा पूर्व 13 भाषाओं में हेल्थ एडवाइजरी जारी की गई, जिससे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों को लेकर जागरूकता बढ़ी। देहरादून, हरिद्वार, टिहरी और पौड़ी को ट्रांजिट मेडिकल हब के रूप में विकसित किया गया।
49 स्थायी चिकित्सा इकाइयां, 20 मोबाइल रिस्पॉन्स पोस्ट
चारधाम मार्ग पर 49 स्थायी चिकित्सा इकाइयां और 20 मोबाइल रिस्पॉन्स पोस्ट तैनात की गईं। स्क्रीनिंग कियोस्क की संख्या बढ़ाकर 57 की गई। इन केंद्रों पर कुल 10,69,792 यात्रियों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिनमें 28,323 को-मॉर्बिड मरीज चिन्हित हुए। समय रहते परामर्श और उपचार से कई गंभीर स्थितियों को टाला गया।
केदारनाथ में आधुनिक चिकित्सा की उपलब्धि
केदारनाथ धाम में स्थापित 17 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल यात्रा की बड़ी उपलब्धियों में रहा। आईसीयू, ऑक्सीजन और इमरजेंसी सुविधाओं से लैस इस अस्पताल ने सैकड़ों श्रद्धालुओं की जान बचाई।
यात्रा के दौरान 31 विशेषज्ञ डॉक्टर, 200 चिकित्सा अधिकारी और 381 पैरामेडिकल कर्मी तैनात रहे। अन्य जिलों, केंद्र सरकार और मेडिकल कॉलेजों से भी विशेषज्ञों की अतिरिक्त तैनाती की गई।
आंकड़ों में सेवा का विस्तार
चारधाम यात्रा 2025 के दौरान:
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कुल ओपीडी मरीज: 4,78,189
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को-मॉर्बिड ओपीडी: 23,383
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दुर्घटना में घायल: 8,450
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इमरजेंसी केस: 51,719
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एंबुलेंस रेफरल: 963
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हेलीकॉप्टर रेफरल: 43
यात्रा मार्ग पर 154 एंबुलेंस तैनात रहीं। AIIMS ऋषिकेश की हेली-एम्बुलेंस ने 43 गंभीर मरीजों को समय पर उच्च चिकित्सा केंद्र पहुंचाया। ‘104 हेल्थ हेल्पलाइन’ पर 32,242 कॉल्स का निस्तारण किया गया।
आपदाओं में भी डटी रही स्वास्थ्य व्यवस्था
मॉनसून के दौरान उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग में बादल फटना, भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की परीक्षा ली। हर आपदा में स्वास्थ्य टीमें मौके पर पहुंचीं। 50 से अधिक मोबाइल मेडिकल कैंप लगाए गए और गंभीर घायलों को हेली-एम्बुलेंस से रेफर किया गया।
‘वल्नरेबल केयर’ बना जीवन रक्षक
आपदाओं के दौरान बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए ‘वल्नरेबल केयर प्रोटोकॉल’ लागू किया गया। बागेश्वर बाढ़ में 200 से अधिक हाई-रिस्क लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2025 में स्वास्थ्य विभाग का कार्य केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवीय सेवा की मिसाल है। दुर्गम परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य कर्मियों ने दिन-रात सेवा देकर लाखों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की। सरकार 2026 में डिजिटल हेल्थ नेटवर्क, टेलीमेडिसिन और एआई आधारित आपदा पूर्वानुमान प्रणाली को और मजबूत करेगी।
स्वास्थ्य मंत्री का बयान
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि मजबूत स्क्रीनिंग, प्रशिक्षित मानव संसाधन और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के कारण सैकड़ों जिंदगियां बचाई जा सकीं। 2026 में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीक आधारित स्वास्थ्य ढांचे को और सशक्त किया जाएगा।
स्वास्थ्य सचिव का बयान
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि 2025 स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण वर्ष रहा, लेकिन टीम हर मोर्चे पर खरी उतरी। समय पर उपचार और समन्वय से बचाई गई हर जान ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।