
देहरादून: राज्य सरकार के मंत्री सुबोध उनियाल के हालिया बयान से कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं। उनके बयान का कुल सार यही संकेत देता है कि यदि एसआईटी (SIT) की जांच पर संदेह किया जाता है, तो इसका असर केवल जांच एजेंसी की विश्वसनीयता पर ही नहीं, बल्कि उन मामलों पर भी पड़ेगा जिनमें एसआईटी की जांच के आधार पर आरोपियों को सजा मिल चुकी है।
मंत्री के बयान से यह भी स्पष्ट संकेत मिलता है कि यदि सीबीआई (CBI) जांच की घोषणा होती है, तो मौजूदा आरोपी कानूनी प्रक्रियाओं का लाभ उठाते हुए जमानत हासिल कर सकते हैं। ऐसे में अब तक की गई जांच और उससे जुड़े निष्कर्षों पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
सुबोध उनियाल के बयान में सुरेश राठौर और उर्मिला की मंशा को लेकर भी संदेह जताया गया है। मंत्री ने यह संकेत देने की कोशिश की कि कहीं ऐसा तो नहीं कि निजी कारणों या व्यक्तिगत खुन्नस के चलते किसी खास व्यक्ति—गौतम—पर आरोप लगाए जा रहे हों।
बयान के माध्यम से मंत्री ने यह सवाल उठाया कि क्या आरोप तथ्यात्मक और निष्पक्ष जांच पर आधारित हैं या फिर इसके पीछे व्यक्तिगत रंजिश काम कर रही है। उनका यह कहना इशारा करता है कि बिना ठोस आधार के लगाए गए आरोप न केवल किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकते हैं।
कुल मिलाकर मंत्री सुबोध उनियाल का यह बयान एसआईटी जांच की विश्वसनीयता, संभावित सीबीआई जांच के प्रभाव और आरोप लगाने वालों की मंशा—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि इस बयान के बाद राजनीतिक और कानूनी स्तर पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।