अंकिता भंडारी हत्याकांड: अल्मोड़ा की दो बहनों ने राष्ट्रपति मुर्मू को अपने खून से लिखी चिट्ठी – ‘आप भी एक महिला हैं’
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से एक भावुक और आक्रोशित करने वाला मामला सामने आया है। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित 'वीआईपी' (VIP) का नाम बार-बार सामने आने से परेशान होकर सल्ट विकास खंड की दो बहनों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपने खून से पत्र लिखा है।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से एक भावुक और आक्रोशित करने वाला मामला सामने आया है। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ (VIP) का नाम बार-बार सामने आने से परेशान होकर सल्ट विकास खंड की दो बहनों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपने खून से पत्र लिखा है।
अल्मोड़ा के सल्ट ब्लॉक की रहने वाली कुसुम लता बौड़ाई और उनकी छोटी बहन संजना (जो कक्षा 10 की छात्रा हैं) ने इस चिट्ठी के जरिए राष्ट्रपति से अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। दोनों बहनें इस बात से बेहद व्यथित हैं कि मामले में एक रसूखदार ‘वीआईपी’ का नाम सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने अपने पत्र के माध्यम से सिस्टम से तीखे सवाल पूछे हैं कि क्या प्रभावशाली लोग कानून से ऊपर हैं?
पत्र में बहनों ने राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए लिखा, “भारत एक न्याय प्रिय देश है और आप न केवल देश की प्रथम नागरिक हैं, बल्कि एक महिला और हमारी अभिभावक भी हैं। इसलिए हमारा अनुरोध है कि आप इस मामले में हस्तक्षेप करें और ‘वीआईपी’ सहित सभी दोषियों को कड़ी सजा दिलाकर न्याय सुनिश्चित करें।” उन्होंने सवाल उठाया कि अगर देश की बेटियों की हत्या पर न्याय नहीं मिला, तो सामान्य परिवार खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करेंगे. कुसुम लता, जो किसान मंच की प्रदेश प्रवक्ता और पहाड़ फाउंडेशन की अध्यक्ष भी हैं, ने स्पष्ट किया कि यह पत्र कोई अनुरोध नहीं बल्कि उनके विरोध दर्ज कराने का तरीका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिस्टम असंवेदनशील हो चुका है और मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत नष्ट कर दिए गए हैं। उनका कहना है कि प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता ही न्याय में देरी का मुख्य कारण है और जनता अब जांच के नाम पर हो रही देरी को स्वीकार नहीं करेगी। यह पत्र काशीपुर के उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा गया है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक स्कूली छात्रा का खून से पत्र लिखना यह दर्शाता है कि लोगों का सिस्टम से भरोसा उठ चुका है। यह मुद्दा अब केवल अंकिता के परिवार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उत्तराखंड की सभी बेटियों की सुरक्षा का आंदोलन बन गया है। रविवार को देहरादून में विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने सीबीआई (CBI) जांच की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। इस दौरान हजारों प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हाथीबड़कला के पास झड़प भी देखने को मिली।