उत्तराखंडदेहरादून

उत्तराखंड UCC में बड़े बदलाव: पहचान छिपाकर शादी अमान्य, नियमों में संशोधन.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यूसीसी नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इसके लिए सरकार जल्द ही अध्यादेश लाएगी। इन संशोधनों का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और कानून की कमियों को दूर करना है।

पहचान छिपाकर की गई शादी होगी ‘अमान्य’ (Voidable)

यूसीसी में एक बड़ा और सख्त प्रावधान जोड़ा गया है।

नया नियम: यदि कोई व्यक्ति अपनी असली पहचान (Identity) छिपाकर विवाह करता है, तो ऐसी शादी को अमान्य (Voidable) घोषित किया जाएगा।

प्रक्रिया: पहले नियमावली में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं था। अब इसे शामिल कर लिया गया है। हालांकि, शादी को अमान्य घोषित करने की अंतिम प्रक्रिया न्यायालय के माध्यम से ही पूरी होगी, लेकिन नियमावली में इसका आधार तैयार कर दिया गया है।

इससे पहले यूसीसी नियमावली में पहचान छिपाकर शादी करने पर उसे अमान्य घोषित करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। हालांकि, शादी को अमान्य घोषित करने की अंतिम प्रक्रिया न्यायालय के माध्यम से ही पूरी होगी, लेकिन अब नियमावली में इस बिंदु के शामिल होने से धोखेधड़ी के मामलों में पीड़ित पक्ष को कानूनी रूप से मजबूत आधार मिलेगा।

विवाह पंजीकरण: 6 महीने का समय बढ़ाकर किया गया एक साल पुराने विवाहों के पंजीकरण को लेकर भी सरकार ने बड़ी राहत दी है। 27 मार्च 2010 से लेकर यूसीसी लागू होने की तारीख (27 जनवरी 2025) के बीच हुई शादियों के लिए पंजीकरण का समय बढ़ा दिया गया है।

  • पहले क्या था नियम: यूसीसी लागू होने के बाद पंजीकरण के लिए केवल 6 महीने का समय दिया गया था।

  • अब क्या है बदलाव: सरकार ने इस समय सीमा को बढ़ाकर एक साल कर दिया है। चूंकि यूसीसी 27 जनवरी 2025 को लागू हुआ था, इसलिए यह एक साल की मियाद 26 जनवरी 2026 को पूरी हो रही है। ऐसे में, इस श्रेणी में आने वाले जोड़े जिनके पास पंजीकरण के लिए अब महज कुछ ही दिन शेष हैं, वे तुरंत अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।जुर्माना नहीं, पेनल्टी: यदि सब-रजिस्ट्रार समय से काम नहीं करते हैं, तो उन पर अब ‘फाइन’ (Fine) की जगह ‘पेनल्टी’ (Penalty) लगाई जाएगी। ‘फाइन’ शब्द को न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हुए इसे हटाया गया है।

  • अपील का हक: अब सब-रजिस्ट्रार को भी अपने ऊपर लगी पेनल्टी के खिलाफ अपील करने का अधिकार दे दिया गया है। पहले यह अधिकार केवल उच्च अधिकारियों (रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार जनरल) तक सीमित था।

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