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उत्तराखंड में भालू का आतंक: डर के साए में परिवार ने छोड़ा गांव, वन विभाग देगा सुरक्षा व मुआवजा

देहरादून: उत्तराखंड में बढ़ते मानव–वन्यजीव संघर्ष का एक और गंभीर मामला सामने आया है। पौड़ी जिले के पोखड़ा विकासखंड की ग्रामसभा पणिया के तोक गांव बस्ताग में भालू के आतंक से परेशान होकर एकमात्र परिवार को गांव छोड़ना पड़ा है। भालू ने परिवार के छह मवेशियों को मार डाला, जिससे उनकी आजीविका पूरी तरह प्रभावित हो गई।

जानकारी के अनुसार, बस्ताग गांव में अब तक हरीश प्रसाद नौटियाल अपने परिवार के साथ निवास कर रहे थे। बीते एक सप्ताह के भीतर भालू ने उनकी दुधारू गाय, बैलों की जोड़ी और बकरियों को निशाना बनाया। इतना ही नहीं, भालू घर के आंगन तक पहुंचने लगा, जिससे परिवार में भय का माहौल बन गया। मजबूरी में परिवार को पड़ोसी गांव में शरण लेनी पड़ी।

वन्यजीवों के हमलों के चलते बस्ताग गांव अब पूरी तरह निर्जन हो गया है। इसके साथ ही राज्य में निर्जन गांवों की संख्या बढ़कर 1727 हो गई है, जो ग्रामीण उत्तराखंड के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

मामले का संज्ञान लेते हुए प्रमुख मुख्य वन संरक्षक आरके मिश्र ने गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित परिवार को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही भालू द्वारा मारे गए सभी छह मवेशियों का तत्काल मुआवजा देने के आदेश भी दिए गए हैं।

आरके मिश्र ने बताया कि वन विभाग परिवार से गांव वापस लौटने का आग्रह करेगा और मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आबादी वाले क्षेत्रों को जंगली जानवरों से सुरक्षित रखने के लिए नई रणनीति पर काम किया जा रहा है।

वन्यजीवों के बढ़ते हमले और पलायन की समस्या राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पहाड़ी गांवों का खाली होना और तेज़ हो सकता है।

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