
देहरादून 21 जनवरी 2026: देहरादून के केदारपुरम क्षेत्र में स्थित राजकीय नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह एवं शिशु सदन बाहर से भले ही एक साधारण परिसर प्रतीत होता हो, लेकिन भीतर प्रवेश करते ही यह एहसास गहराता है कि यह स्थान केवल एक भवन नहीं, बल्कि टूटे विश्वासों को जोड़ने, बिखरी ज़िंदगियों को संवारने और नई शुरुआत का साहस देने का जीवंत केंद्र है।
यहाँ हर चेहरा अपनी एक कहानी कहता है—किसी की आँखों में छूटा हुआ बचपन है, किसी की खामोशी में दर्द की टीस और किसी की मुस्कान में नए जीवन की उम्मीद। यह वह सुरक्षित आश्रय है, जहाँ परित्यक्त और बेसहारा महिलाओं तथा अनाथ बच्चों को सिर्फ छत नहीं, बल्कि अपनापन, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिलता है।

माननीय मुख्यमंत्री की प्रेरणा और देहरादून जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता से इस परिसर को एक संवेदनशील, सुरक्षित और सशक्त वातावरण में बदला गया है। यहाँ महिलाओं और बच्चों को केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के अवसर भी दिए जा रहे हैं। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित पोषण, समय पर उपचार, स्वच्छ वातावरण और स्नेहिल देखभाल—ये सभी व्यवस्थाएँ उन अदृश्य घावों पर मरहम का काम कर रही हैं।
जिलाधिकारी सविन बंसल के सतत प्रयासों से बुजुर्ग महिलाओं के लिए 30 बेड का दो मंजिला अतिरिक्त भवन लगभग पूर्णता की ओर है। यह भवन केवल एक संरचना नहीं, बल्कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुँची महिलाओं के लिए सुकून, सुरक्षा और सम्मान का ठिकाना बनेगा। निकेतन की व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि कोई भी महिला या बच्चा स्वयं को उपेक्षित महसूस न करे।

जिला योजना एवं खनिज न्यास से बजट की व्यवस्था कर नारी निकेतन के आधारभूत ढांचे को मजबूत किया गया है। सीवर लाइन, डोरमेट्री, आवासीय सुविधाएँ, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का विस्तार किया गया है। वर्तमान में नारी निकेतन में 178 बेसहारा, परित्यक्त एवं शोषित महिलाएँ, बालिका निकेतन में 21 बालिकाएँ, जबकि बाल गृह एवं शिशु सदन में 23 बच्चे सुरक्षित वातावरण में निवास कर रहे हैं।
यहाँ बच्चों को औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ कंप्यूटर शिक्षा भी दी जा रही है। वहीं महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, ऊनी वस्त्र निर्माण और क्राफ्ट डिज़ाइन जैसे आजीविका आधारित प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं। संगीत, योग और वाद्य यंत्र प्रशिक्षण के माध्यम से उनके मानसिक और शारीरिक सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बालिका निकेतन में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए खेल मैदान का निर्माण कराया जा रहा है, जहाँ वे खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन और योग जैसी गतिविधियों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए दो अतिरिक्त होमगार्ड, दो नर्सों की तैनाती और डॉक्टरों की नियमित विजिट सुनिश्चित की गई है।
निकेतन परिसर में शौचालय-स्नानागार, डायनिंग एरिया, मंदिर परिसर की ग्रिलिंग, जिम, लॉन्ड्री रूम, रसोई, भवन अनुरक्षण, इन्वर्टर स्थापना सहित अनेक विकास कार्य कराए गए हैं। बच्चों के लिए पर्याप्त रजाइयाँ, बेड और डबल गद्दों की व्यवस्था की गई है, जिससे उन्हें सुरक्षित और आरामदायक वातावरण मिल सके।
दिसंबर माह में जिलाधिकारी द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देश अब धरातल पर साफ दिखाई दे रहे हैं। प्रशासन की संवेदनशील सोच और ठोस क्रियान्वयन से योजनाएँ काग़ज़ से उतरकर ज़िंदगियाँ बदलने लगी हैं।
केदारपुरम का यह निकेतन आज केवल एक संस्था नहीं, बल्कि उम्मीद, भरोसे और नई शुरुआत की मिसाल बन चुका है—जहाँ इंसानियत आज भी ज़िंदा है।