
देहरादून (28 जनवरी 2026): उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने जनजातीय समुदाय के उत्थान के लिए एक ऐतिहासिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य गठन के बाद पहली बार प्रदेश के 4 जनजाति बाहुल्य जिलों में अब अलग से ‘जिला जनजाति कल्याण अधिकारी’ (District Tribal Welfare Officers) की तैनाती की जाएगी।

अब अलग अधिकारी संभालेंगे कमान धामी मंत्रिमंडल ने ‘उत्तराखंड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा संशोधन नियमावली-2025’ को मंजूरी दे दी है। अब तक इन जिलों में जनजाति कल्याण की योजनाओं का जिम्मा समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के पास था, जिससे काम का बोझ अधिक होने के कारण योजनाओं की रफ्तार धीमी रहती थी।
इन 4 जिलों में होगी तैनाती: राज्य में करीब 3 लाख अनुसूचित जनजाति की आबादी है। जिन चार जिलों को विशेष फोकस में रखा गया है, वे हैं:
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देहरादून
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चमोली
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उधम सिंह नगर
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पिथौरागढ़
सीधी भर्ती और प्रमोशन का फार्मूला जनजाति कल्याण विभाग के निदेशक संजय सिंह टोलिया ने बताया कि कुल 4 पद सृजित किए गए हैं। इनकी भर्ती प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
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02 पद: सीधी भर्ती (Direct Recruitment) के माध्यम से भरे जाएंगे।
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02 पद: विभागीय पदोन्नति/स्थानांतरण से भरे जाएंगे (इसमें एक कार्यालय अधीक्षक आईटीआई और एक अधीक्षक आश्रम पद्धति स्कूल से तैनात होंगे)।
अधिकारियों का क्या कहना है? सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ‘पीएम जनमन’ (PM JANMAN) और ‘पीएम जोगा’ जैसी कई महत्वकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं। समर्पित अधिकारियों की तैनाती होने से इन योजनाओं का क्रियान्वयन (Implementation) अब और तेजी से हो सकेगा और लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचेगा।