
देहरादून (30 जनवरी 2026): उत्तराखंड में स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की सरकारी मुहिम अब रंग ला रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में कृषि, पर्यटन और उद्योग विभागों की समीक्षा बैठक की। आंकड़ों के मुताबिक, बीते चार सालों में राज्य में 780 होम स्टे स्थापित किए गए हैं और 29 स्थानीय उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है।
पर्यटन और स्वरोजगार में बड़ी छलांग सीएम धामी ने बताया कि सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ युवाओं को मिल रहा है: दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना: पिछले 4 सालों में 780 होम स्टे तैयार हुए, जिसके लिए सरकार ने 188.58 करोड़ रुपये की मदद दी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना: पर्यटन स्वरोजगार की इस योजना से 4 सालों में 1000 से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं। सीएम स्वरोजगार योजना: सरकार ने 32,000 का लक्ष्य रखा था, लेकिन 33,620 लाभार्थियों को योजना से जोड़कर 202.72 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई।
![]()
मिलेट मिशन: किसानों को कर रहा मालामाल मोटे अनाज (Millets) को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई 134 करोड़ रुपये की ‘स्टेट मिलेट पॉलिसी’ के नतीजे उत्साहजनक हैं।
फसलें: मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी और चीनी को इसमें शामिल किया गया है। खरीद: इस साल 5000 मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 5,386 मीट्रिक टन मिलेट खरीदा जा चुका है। नेटवर्क: किसानों से खरीद के लिए 216 केंद्र खोले गए हैं और डेढ़ लाख किसान इससे लाभान्वित हुए हैं।
पहाड़ी उत्पादों की वैश्विक पहचान (GI Tag) अधिकारियों ने बताया कि अब तक राज्य के 29 उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है, जिनमें 18 उत्पाद कृषि क्षेत्र से हैं। इस साल 25 और नए उत्पादों को जीआई टैग दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। सेब, कीवी और शहद पर फोकस सीएम धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सेब की अतिसघन बागवानी (High Density Gardening) और कीवी उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जाए। साथ ही ‘हनी मिशन’ के तहत शहद के ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन पर जोर दिया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल सके।