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उत्तराखंड: 1 से 15 फरवरी तक चलेगा विशेष ‘वोटर मैपिंग’ अभियान; दूसरे चरण में युवाओं और महिलाओं पर रहेगा फोकस.

देहरादून (30 जनवरी 2026): भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर उत्तराखंड में मतदाता सूची को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू होने जा रहा है। प्रदेश में ‘प्री-एसआईआर’ (Pre-SIR) गतिविधियों के तहत 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दूसरे चरण में निर्वाचन आयोग का पूरा जोर युवा और महिला मतदाताओं की पहचान और मैपिंग पर रहेगा।

बीएलओ घर-घर जाकर करेंगे सत्यापन मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के निर्देशन में चल रहे इस अभियान के तहत बीएलओ (BLO) आउटरीच अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान बीएलओ विशेष रूप से यह सुनिश्चित करेंगे कि युवा और महिला मतदाताओं का नाम सूची में सही तरीके से मैप हो।  मकसद मतदाता सूची में लिंग अनुपात (Gender Ratio) को संतुलित करना और नए युवा वोटर्स को जोड़ना है।

75% काम पूरा, 2003 की सूची से हो रहा मिलान अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने अभियान की प्रगति की जानकारी दी।

प्रगति: पहले चरण में प्रदेश के 75 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग का काम पूरा कर लिया गया है।

तकनीकी पहलू: वर्तमान मतदाता सूची की मैपिंग वर्ष 2003 की मतदाता सूची से की जा रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पिछले दो दशकों में मतदाता जनसांख्यिकी (Demographics) में क्या बदलाव आए हैं और कौन से परिवार शिफ्ट हो गए हैं या नए जुड़े हैं।

 

15 दिन का विशेष मौका निर्वाचन आयोग ने आम जनता से अपील की है कि 1 से 15 फरवरी के बीच जब बीएलओ उनके घर आएं, तो उन्हें सही जानकारी दें और सहयोग करें। यह अभियान पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के लिए बेहद अहम है।बीएलओ घर-घर जाकर करेंगे सत्यापन मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के निर्देशन में चल रहे इस अभियान के तहत बीएलओ (BLO) आउटरीच अभियान चलाया जाएगा।

इस दौरान बीएलओ विशेष रूप से यह सुनिश्चित करेंगे कि युवा और महिला मतदाताओं का नाम सूची में सही तरीके से मैप हो।  इसका मकसद मतदाता सूची में लिंग अनुपात (Gender Ratio) को संतुलित करना और नए युवा वोटर्स को जोड़ना है।

75% काम पूरा, 2003 की सूची से हो रहा मिलान अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने अभियान की प्रगति की जानकारी दी।

पहले चरण में प्रदेश के 75 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग का काम पूरा कर लिया गया है।

वर्तमान मतदाता सूची की मैपिंग वर्ष 2003 की मतदाता सूची से की जा रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पिछले दो दशकों में मतदाता जनसांख्यिकी (Demographics) में क्या बदलाव आए हैं और कौन से परिवार शिफ्ट हो गए हैं या नए जुड़े हैं।

15 दिन का विशेष मौका निर्वाचन आयोग ने आम जनता से अपील की है कि 1 से 15 फरवरी के बीच जब बीएलओ उनके घर आएं, तो उन्हें सही जानकारी दें और सहयोग करें। यह अभियान पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के लिए बेहद अहम है।

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