
डोईवाला/देहरादून: उत्तराखंड में लोको पायलट की समझदारी और तत्परता के कारण एक बड़ा रेल हादसा टल गया। यदि समय रहते ट्रेन को रोका न जाता तो सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी, जिनमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी शामिल थे।
घटना डोईवाला और हर्रावाला के बीच स्थित नकरौंदा रेलवे फाटक पर हुई। जानकारी के अनुसार, मसूरी एक्सप्रेस दिल्ली से देहरादून की ओर आ रही थी। लोको पायलट को मैन्युअल तरीके से नकरौंदा फाटक बंद होने का ग्रीन सिग्नल मिल चुका था, जिसके बाद ट्रेन निर्धारित गति से आगे बढ़ रही थी।
इसी दौरान फाटक पर तैनात गेटमैन ने अचानक लापरवाही बरतते हुए फाटक खोल दिया। इसके चलते दोनों ओर खड़े वाहन चालक जल्दबाजी में ट्रैक पार करने लगे। देखते ही देखते रेलवे ट्रैक पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। उस समय फाटक के दोनों तरफ करीब 100 से अधिक वाहन खड़े थे।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए लोको पायलट ने तत्काल सूझबूझ का परिचय दिया और इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को समय रहते रोक लिया। यदि कुछ सेकेंड की भी देरी हो जाती तो बड़ा हादसा होना तय था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उस समय कई स्कूली वाहन भी फाटक के पास मौजूद थे, जिससे बच्चों की जान पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा था। लोको पायलट की सतर्कता से न केवल बड़ा रेल हादसा टला, बल्कि सैकड़ों यात्रियों और स्थानीय लोगों की जान सुरक्षित रही।
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। प्रथम दृष्टया गेटमैन की गंभीर लापरवाही सामने आने पर उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। रेलवे विभाग द्वारा पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।
रेलवे प्रशासन ने लोको पायलट की तत्परता और सूझबूझ की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सतर्कता के कारण एक बड़ा हादसा टल सका।