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18 महीने की खुशी बनी बड़ी बहन की जिंदगी का सहारा,

जौलीग्रांट अस्पताल में सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट

देहरादून: पांच साल की गंभीर रूप से बीमार बच्ची की जिंदगी बचाने के लिए उसकी 18 महीने की छोटी बहन ‘खुशी’ फरिश्ता बनकर सामने आई। हिमालय जौलीग्रांट अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने जटिल प्रक्रिया के तहत सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट कर दोनों बहनों को नई उम्मीद दी है। फिलहाल दोनों की हालत स्थिर बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, पांच वर्षीय बच्ची लंबे समय से गंभीर रक्त संबंधी बीमारी से जूझ रही थी। चिकित्सकीय जांच में सामने आया कि उसके जीवन को बचाने के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही एकमात्र प्रभावी विकल्प है। परिवार की सहमति के बाद छोटी बहन की जांच की गई, जिसमें वह उपयुक्त डोनर पाई गई।

अस्पताल के हेमेटोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग की विशेषज्ञ टीम ने पूरी प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक अंजाम दिया। इतनी कम उम्र के डोनर से ट्रांसप्लांट करना चिकित्सा की दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन से पहले दोनों बच्चियों की कई चरणों में जांच की गई और संक्रमण से बचाव के विशेष इंतजाम किए गए।

सफल ट्रांसप्लांट के बाद बड़ी बहन को विशेष निगरानी में रखा गया, जहां उसकी रिकवरी पर लगातार नजर रखी जा रही है। वहीं, छोटी बहन खुशी की भी नियमित चिकित्सकीय जांच की जा रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, दोनों की स्थिति संतोषजनक है और चिकित्सकों की टीम लगातार देखरेख कर रही है।

डॉक्टरों ने इसे चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि समय पर सही उपचार और परिवार के सहयोग से बच्ची की जान बचाना संभव हो सका। परिवार ने अस्पताल की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया है।

इस सफल उपचार ने न केवल एक परिवार को नई जिंदगी दी है, बल्कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञता पर भरोसा भी मजबूत किया है।

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