देहरादून (12 फरवरी 2026): उत्तराखंड के पहाड़ों में रेल की सीटी सुनने का सपना अब हकीकत बनने की दहलीज पर है। सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का काम अंतिम चरणों में है। टनल निर्माण का 95.30% कार्य पूरा हो चुका है। इस बीच, राज्य सरकार और रेलवे ने एक क्रांतिकारी योजना तैयार की है—सुरक्षा के लिए बनाई जा रही ‘एस्केप टनल’ (Escape Tunnels) को भविष्य में ‘समानांतर सड़कों’ (Parallel Roads) के रूप में विकसित किया जाएगा।

आमतौर पर रेलवे टनल के साथ बचाव कार्य के लिए एस्केप टनल बनाई जाती हैं। लेकिन उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और आपदा की संभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे बहुउद्देशीय बनाने का विजन रखा है।
यदि इन टनलों को सड़क के रूप में विकसित किया जाता है, तो आपदा के समय यह राहत और बचाव कार्य के लिए लाइफलाइन बनेंगी। साथ ही, यह स्थानीय लोगों के लिए आवागमन का एक नया विकल्प भी बन सकती हैं।
2. स्टेशनों में दिखेगी देवभूमि की संस्कृति रेलवे स्टेशनों को केवल स्टॉपेज नहीं, बल्कि सांस्कृतिक केंद्र बनाया जा रहा है। हर स्टेशन की अपनी एक थीम होगी:
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शिवपुरी: नीलकंठ महादेव
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ब्यासी: महर्षि वेदव्यास
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देवप्रयाग: समुद्र मंथन
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मलेथा: वीर माधो सिंह भंडारी
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श्रीनगर: मां राजराजेश्वरी
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धारी देवी: मां धारी देवी
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कर्णप्रयाग: बदरीनाथ और राधा-कृष्ण थीम
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गौचर: बाल गोविंद कृष्ण
3. टनकपुर-बागेश्वर: राष्ट्रीय परियोजना की मांग कुमाऊं क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के लिए भी सरकार गंभीर है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार से इसे ‘राष्ट्रीय परियोजना’ घोषित करने का आग्रह किया जाएगा ताकि फंड की कमी न हो और निर्माण में तेजी आए। इसके लिए तीन सर्वे विकल्प प्रस्तावित हैं, जो अल्मोड़ा और सोमेश्वर को भी जोड़ सकते हैं।
4. कब शुरू होगी ट्रेन? रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलमार्ग का एक चरण इसी साल (2026) शुरू होने की पूरी संभावना है। वहीं, पूरी परियोजना को 2027 के अंत तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।