रुद्रपुर/ऊधम सिंह नगर: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में पुलिस और बाल संरक्षण टीम की सजगता से एक नाबालिग लड़की का जीवन बर्बाद होने से बच गया। जिले के पुलभट्टा थाना क्षेत्र (किच्छा) में पुलिस ने ऐन वक्त पर एक बाल विवाह रुकवा दिया। हरियाणा के जींद से बारात लेकर पहुंचे 24 वर्षीय दूल्हे को बिना दुल्हन के ही बैरंग लौटना पड़ा। पुलिस ने इस मामले में वर और वधू दोनों पक्षों के चार लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है।

घटना 16 फरवरी की रात की है। इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल डेवलपमेंट (आईएसडी) की निदेशक बिंदुवासिनी को गुप्त सूचना मिली थी कि पुलभट्टा थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग लड़की का विवाह कराया जा रहा है। उन्होंने तत्काल डायल 112 पर पुलिस को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलभट्टा पुलिस और बाल संरक्षण की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। वहां देखा गया कि विवाह की रस्में चल रही थीं और तैयारियां अंतिम चरण में थीं।
दस्तावेजों में खुली पोल: दुल्हन 15 की, दूल्हा 24 का मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब वधू पक्ष (लड़की की मां) से उम्र संबंधी दस्तावेज मांगे, तो वे कोई वैध प्रमाण पत्र नहीं दिखा सके। पुलिस की जांच में सामने आया कि दुल्हन की उम्र मात्र 15 वर्ष है, जो कि वैधानिक विवाह आयु (18 वर्ष) से कम है। वहीं, दूल्हे की उम्र 24 वर्ष बताई गई।
दुल्हन को भेजा गया वन स्टॉप सेंटर पुलिस ने तुरंत शादी की रस्में रुकवा दीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए किशोरी को आईएसडी निदेशक की सुपुर्दगी में देते हुए बाल कल्याण समिति (CWC) के माध्यम से ‘वन स्टॉप सेंटर’, रुद्रपुर भेज दिया गया है। वहां उसकी सुरक्षा और काउंसलिंग की व्यवस्था की गई है।
दूल्हे और माता-पिता पर FIR दर्ज 17 फरवरी को एसआई रिनी चौहान ने मामले की जांच पूरी की। इसके बाद पुलिस ने नाबालिग लड़की के माता-पिता, हरियाणा निवासी दूल्हे और दूल्हे के पिता के खिलाफ बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस की अपील पुलभट्टा थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप मिश्रा ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा, “बाल विवाह एक गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में पुलिस कठोर कार्रवाई करेगी।” उन्होंने आम जनता से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह जैसी कुप्रथा की जानकारी मिले, तो तुरंत पुलिस या प्रशासन को सूचित करें।