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उत्तराखंड हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, साथ ही नैनीताल जिला न्यायालय को तीसरी बार धमकी मिली है.

नैनाताल: उत्तराखंड के अलग-अलग जिला न्यायालयों को लगातार बम से उड़ाने की धमकी मिल रही है. लेकिन अब धमकी का सिलसिला उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल तक पहुंच चुका है. गुरुवार को धमकी भरा ई-मेल आने के बाद हाईकोर्ट परिसर को खाली कराते हुए सुरक्षा बढ़ाई गई. उधर, नैनीताल जिला न्यायालय को भी फिर से बम से उड़ाने की धमकी मिली है. जिला न्यायालय को लगातार तीसरी धमकी मिली है.

गुरुवार को नैनीताल हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया. हाईकोर्ट परिसर को खाली कराते हुए पुलिस जवानों के सुरक्षा घेरे में तब्दील किया गया. बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ई-मेल के जरिए हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई.

उत्तराखंड हाईकोर्ट और नैनीताल जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी; परिसर खाली, सुरक्षा चाक-चौबंद

हाईकोर्ट परिसर कराया गया खाली पुलिस सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को जैसे ही हाईकोर्ट को बम से उड़ाने वाले ई-मेल की जानकारी मिली, तत्काल प्रभाव से पूरे न्यायालय परिसर को खाली करा लिया गया। सुरक्षा के मद्देनजर परिसर को पुलिस और सुरक्षा बलों के कड़े घेरे में तब्दील कर दिया गया है। डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते (BDS) की मदद से चप्पे-चप्पे की सघन चेकिंग की जा रही है।

जिला न्यायालय को लगातार तीसरे दिन धमकी हाईकोर्ट के साथ-साथ नैनीताल जिला न्यायालय को भी गुरुवार को एक बार फिर ई-मेल भेजकर बम से उड़ाने की धमकी दी गई। चिंताजनक बात यह है कि यह जिला न्यायालय को मिली लगातार तीसरी धमकी है और हर बार हमलावरों ने अलग-अलग तरीके से दहशत फैलाने की बात कही है:

पहला दिन: न्यायालय के न्यायाधीशों की कुर्सियों में बम लगाने की धमकी।

दूसरा दिन: मानव बम (Suicide Bomber) के जरिए कोर्ट को दहलाने की चेतावनी।

तीसरा दिन (गुरुवार): ड्रोन बम के माध्यम से न्यायालय पर हमला करने की धमकी।

अधिवक्ताओं में रोष, काम बंद करने की मांग लगातार मिल रही इन धमकियों के कारण न्यायालय परिसर में दहशत का माहौल है। वकीलों, वादकारियों (मुवक्किलों) और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। हाईकोर्ट और नैनीताल जिला न्यायालय के अधिवक्ताओं ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि जब तक इन धमकी भरे ई-मेल भेजने वाले असली आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार नहीं कर लिया जाता, तब तक एहतियात के तौर पर दोनों न्यायालयों को बंद रखा जाए। खतरे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने दोनों न्यायालयों की सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य कर दी है: जिला और हाईकोर्ट परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। न्यायालय आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मेटल डिटेक्टर और कड़ी सघन जांच से होकर गुजरना पड़ रहा है। बिना पुख्ता पहचान और जरूरी काम के किसी को भी अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है।

फिलहाल, पुलिस की साइबर सेल और खुफिया एजेंसियां ई-मेल के आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रेस करने में जुटी हैं, ताकि इस साजिश के पीछे बैठे अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे डाला जा सके।

 

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