उत्तराखंडदेहरादून

गोरखा हिमालयन फेस्टिवल के अंतिम दिन रैंप पर उतरीं हिमालयी संस्कृतियाँ.

अमेरिका से आये एनआरआई ने दो छात्रों को शिक्षा के लिए दी आर्थिक सहायता.

देहरादून। शहीद मेजर दुर्गा मल्ल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा गढ़ी कैंट स्थित महेन्द्रा ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय ‘गोरखा हिमालयन फेस्टिवल’ का रविवार को शानदार समापन हुआ। उत्सव के अंतिम दिन जहाँ ज्ञानवर्धक सत्रों का आयोजन हुआ, वहीं सांस्कृतिक संध्या में हिमालयी राज्यों की विविध कला और वेशभूषा का अनूठा संगम देखने को मिला। इस मौके पर संस्था के कार्यों से प्रभावित होकर अमेरिका में निवासरत एनआरआई प्रदीप गर्ग द्वारा दो छात्रों सबिया थापा पुत्री धुवन सिंह थापा सेलाकुई और राजकुमाल पुत्र जयराम कुमाल को शिक्षा प्रदान करने के लिए आर्थिक सहयोग दिया गया।

गोरखा हिमालयन फेस्टिवल के अंतिम दिन सुबह के कार्यक्रमों की शुरुआत पर्यावरण के अनुकूल जीवन पर आयोजित कार्यशाला से हुई,जिसमे डॉ नेचर से आई हुई बुद्धारानी लिम्बू द्वारा कैसे जीवन को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाए, इसकी जानकारी दी गई। दूसरी कार्यशाला खाद्य प्रसंस्करण पर आयोजित की गई, जिसमें उद्यान विभाग के सहायक विकास अधिकारी दीपक रतूड़ी ने ‘पीएम सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना’के तहत मिलने वाली सब्सिडी और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में बताया।

संस्था के कार्यों से प्रभावित होकर अमेरिका में निवासरत एनआरआई प्रदीप गर्ग द्वारा दो छात्रों सबिया थापा पुत्री धुवन सिंह थापा सेलाकुई और राजकुमाल पुत्र जयराम कुमाल को शिक्षा प्रदान करने के लिए आर्थिक सहयोग दिया गया, जिस पर ट्रस्ट की अध्यक्ष कमला थापा द्वारा उन्हें धन्यवाद दिया गया।

सांस्कृतिक मंच पर शाम पांच बजे से सुरों और ताल का सफर शुरू हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने शिरकत की। उनके साथ समाजसेवी चिरंजीव शर्मा और राजीव शर्मा भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री ने हिमालयी संस्कृति के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि पहाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और पहचान को दर्शाने वाले ऐसे आयोजन निरंतर होने चाहिए.

इस अवसर पर उत्तराखंड की नौनी सोसायटी की ओर से ‘हिमालयी क्षेत्र के परिधान’ प्रदर्शन कार्यक्रम में विशेष सहयोग किया गया, जो कि विशेष आकर्षण का केंद्र रहा । शो के दौरान सागरिका दीवान (राय ड्रेस), पूनम थापा (मगर ड्रेस), नूपुर शाही (असमी ड्रेस), सोनिका भंडारी (मणिपुरी ड्रेस) और अंशिका थापा (गुरुंग ड्रेस) सहित गढ़वाली,कुमाऊंनी, लिम्बू, तामांग, तिब्बती और क्षेत्र की संस्कृति के पारंपरिक परिधानों को पहन रैंप पर प्रदर्शित कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा, गीतांजलि योगशाला ने ‘नमो नमो’ गीत पर और गुनियो चोली ग्रुप ने ‘मखमली’ गीत पर अपनी कला का प्रदर्शन किया । यमु राणा ग्रुप द्वारा प्रस्तुत ‘सालैजो’ नृत्य और सोनाली राय के गीतों ने भी उत्सव की रौनक बढ़ाई ।स्थानीय कलाकारों में दीप्ति राणा और देविन शाही की जुगलबंदी विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिन्होंने ‘भुई सोरी ढोगे है’, ‘यो गाउँको ठिट्टो म’ के साथ-साथ ‘गोली सीसाको’ और ‘लाठी चार्ज नगर’ जैसे गीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया । इनके साथ ही सतीश थापा ने भी ‘मेडले’ गीतों की श्रृंखला में अपनी गायकी से शाम को और भी यादगार बना दिया । सिलीगुड़ी से आये गायक विक्रम कालाकोटी और सुरक्षा सिंचुरी ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को झुमा दिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री के ओएसडी भूपेंद्र बसेड़ा ने शहीदों को समर्पित कविता और देव स्तुति गीत की प्रस्तुति दी।कार्यक्रम में केबिनेट मंत्री गणेश जोशी की पत्नी निर्मला जोशी, ट्रस्ट की अध्यक्ष कमला थापा, सचिव प्रभा शाह, संकल्प, उपासना बिष्ट, गोदावरी थापली, पदम सिंह थापा, वंदना बिष्ट, सूर्य विक्रम शाही आदि ने विशेष सहयोग किया।

Gorkha Himalayan Festival

हिमालयी पारंपरिक घर बना रहा आकर्षण का केंद्र

मेले में आये आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा प्रवेश द्वार पर स्थित एक छोटा सा पहाड़ी शैली में बना हुआ घर, जिसमें हिमालयी पारंपरिक घर और घरेलू पारंपरिक वस्तुओं को दर्शाया गया।ट्रस्ट की अध्यक्ष कमला थापा और सचिव प्रभा शाह ने बताया कि ये पर्यावरण अनुकूल घर जो केवल प्राकृतिक संसाधनों से बना हुआ था। जो ऑटो इनशुलेशन पर आधारित तथा भूकंपरोधी है. इसके आलावा पारंपरिक गोरखा समाज की घरेलु वस्तुएँ जैसे जाटों,डोको.डालो, धनुष बाण,खूंखरि,ओखल और मूसल शामिल थे. उन्होंने बताया कि नॉर्थ ईस्ट से लेकर कई हिमालयन क्षेत्र में ऐसे घर और ये सभी वस्तुएँ देखने को मिलती हैं,जो समृद्ध हिमालय क्षेत्र की संस्कृति को दर्शाते हैं।

 

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