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उत्तराखंड हाईकोर्ट:ऑल वेदर रोड पीड़ितों को 6 हफ्ते में मुआवजे का आदेश, दून अतिक्रमण मामले की जनहित याचिका निस्तारित.

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय (नैनीताल हाईकोर्ट) ने राज्य से जुड़े दो अलग-अलग महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई करते हुए अहम निर्देश जारी किए हैं। पहले मामले में, कोर्ट ने उत्तरकाशी जिले में ‘चारधाम ऑल वेदर रोड’ परियोजना के कारण अपने मकान खो चुके पीड़ितों को बड़ी राहत दी है। वहीं, दूसरे मामले में देहरादून के राजेंद्र नगर स्थित कथित ग्रीन बेल्ट अतिक्रमण से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) को निस्तारित कर दिया है।

photo:Social Media

यह मामला उत्तरकाशी जिले के बड़कोट क्षेत्र का है। स्थानीय निवासी चंद्रमाला भट्ट और जयवीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई थी कि चारधाम ऑल वेदर रोड के निर्माण कार्य के दौरान उनके मकानों को भारी क्षति पहुंची है।

क्या था याचिकाकर्ताओं का दर्द? याचिकाकर्ताओं का कहना था कि मकान टूटने से वे पूरी तरह बेघर हो गए हैं और खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हैं। प्रशासन को कई बार विस्थापन और मुआवजे के लिए प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः उन्हें न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

हाईकोर्ट का आदेश इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए संबंधित कार्यदायी संस्था (आरओडब्लू) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह 6 सप्ताह के भीतर प्रभावितों को उनके क्षतिग्रस्त मकानों का उचित मुआवजा दे। इस फैसले से पीड़ितों को अपने घर दोबारा बसाने की बड़ी उम्मीद जगी है।


2. देहरादून: राजेंद्र नगर अतिक्रमण मामले में प्रशासन की कार्रवाई रहेगी जारी

दूसरा मामला देहरादून की राजेंद्र नगर कॉलोनी के ब्लॉक-ए में सार्वजनिक पार्क और ग्रीन बेल्ट की लगभग 79,710 वर्ग फुट भूमि पर कथित अवैध कब्जे से जुड़ा था। ‘राजेंद्र नगर रेजिडेंट्स वेलफेयर सोसाइटी’ ने जनहित याचिका दायर कर अवैध निर्माण ढहाने की मांग की थी।

कोर्ट में क्या तथ्य आए सामने? इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की।

  • संयुक्त रिपोर्ट: देहरादून नगर निगम और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने अपनी संयुक्त रिपोर्ट में बताया कि लेआउट प्लान में कोई सरकारी भूमि या पार्क नहीं मिला है। हालांकि, खसरा नंबर 34 पर अवैध निर्माण जरूर पाया गया था, जिसे MDDA द्वारा पहले ही सील किया जा चुका है।

  • हस्तक्षेपकर्ता का दावा: सुनवाई के दौरान विनय कुमार गुप्ता नामक हस्तक्षेपकर्ता ने आरोप लगाया कि विवादित भूमि एक खेल का मैदान है। वहीं, निजी प्रतिवादियों ने इसे अपनी निजी संपत्ति बताते हुए सीलिंग के खिलाफ स्टे (स्थगन आदेश) होने की बात कही।

हाईकोर्ट का फैसला खंडपीठ ने पाया कि इस विवादित भूमि को लेकर हस्तक्षेपकर्ता विनय कुमार गुप्ता ने पहले ही एक सिविल सूट (दीवानी मुकदमा) दायर कर रखा है, जो निचली अदालत में विचाराधीन है। चूंकि मामला पहले से दीवानी अदालत में है, इसलिए हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं पाया और उसे निस्तारित कर दिया।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि MDDA अवैध निर्माणों के खिलाफ उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 के तहत अपनी कार्रवाई नियमानुसार पूरी करे और जनहित याचिका के बंद होने से लंबित सिविल मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

 

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