देहरादून। उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी के संगठन और कार्यकर्ताओं के लिए सरकार ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने विभिन्न आयोगों, बोर्डों और परिषदों में खाली पड़े पदों पर नेताओं को समायोजित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। ताजा घटनाक्रम में करीब 15 से 20 और नेताओं को महत्वपूर्ण पदों पर नवाजा गया है, जिसके बाद सरकार में ‘दायित्वधारियों’ का कुल आंकड़ा अब 80 के करीब पहुंच गया है।

कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी सक्रियता
कैबिनेट विस्तार के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि संगठन के प्रति समर्पित नेताओं को सरकार में महत्वपूर्ण भूमिकाएं दी जाएंगी। अब शासन की ओर से जारी आदेशों ने इन अटकलों पर मुहर लगा दी है। सरकार ने विभिन्न विभागों के अंतर्गत आने वाले आयोगों और परिषदों में उपाध्यक्ष एवं सदस्यों के पदों पर नियुक्तियां कर कार्यकर्ताओं को सम्मानजनक जिम्मेदारी सौंपने का काम किया है।
प्रमुख नियुक्तियां और अहम नाम
सरकार द्वारा जारी ताजा सूची में भाजपा नेता बलजीत सोनी का नाम प्रमुखता से चर्चा में है, जिन्हें उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। मंत्री परिषद अनुभाग ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
इसके अलावा, जिन नेताओं को सदस्य के रूप में विभिन्न आयोगों और समितियों में जगह मिली है, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
राजपाल कश्यप
रुचि गिरी
राव खाले खां
प्रेमलता
दीप प्रकाश नेवलिया
योगेश रजवार
मनोज गौतम
इन परिषदों में भी मिले दायित्व
पिछले कुछ समय में सरकार ने शासन के कामकाज में गति लाने और कार्यकर्ताओं को जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण परिषदों में नियुक्तियां की हैं, जिनमें शामिल हैं:
राज्य स्तरीय खेल परिषद (अध्यक्ष)
राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद (उपाध्यक्ष)
राज्य पिछड़ा वर्ग परिषद (उपाध्यक्ष)
चाय विकास सलाहकार परिषद (उपाध्यक्ष)
युवा कल्याण सलाहकार परिषद (उपाध्यक्ष)
संगठनात्मक संतुलन बनाने की कवायद
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियुक्तियों के जरिए सरकार न केवल संगठन के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है, बल्कि सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक और सलाहकारी भूमिकाओं में अवसर देकर आने वाले चुनावी समीकरणों को भी साध रही है।
अतीत की यादें हुई ताजा
उत्तराखंड की राजनीति में एक साथ इतने दायित्व बांटने के इस दौर ने पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल की यादें ताजा कर दी हैं। तिवारी सरकार पर 200 से अधिक नेताओं को दायित्व देने के आरोप लगे थे। हालांकि, बाद की सरकारों ने वित्तीय भार और आलोचना के डर से इस संख्या को सीमित रखा था। लेकिन धामी सरकार के वर्तमान कार्यकाल में जिस तरह से नियुक्तियों का सिलसिला चल रहा है, उससे माना जा रहा है कि यह सूची अभी और लंबी हो सकती है।
फिलहाल, इन नियुक्तियों से भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और माना जा रहा है कि शेष रिक्त पदों पर भी जल्द ही नई घोषणाएं हो सकती हैं।