
देहरादून: उत्तराखंड सरकार के ऑडिट निदेशालय में प्रशासनिक अस्थिरता लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि बीते 13 वर्षों में इस महत्वपूर्ण विभाग में 17 निदेशक बदले जा चुके हैं, जबकि कोई भी निदेशक एक वर्ष का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर सका।
प्रदेश के सभी सरकारी विभागों में हर साल होने वाले करोड़ों रुपये के लेन-देन की ऑडिट जिम्मेदारी जिस निदेशालय पर है, वहां बार-बार नेतृत्व परिवर्तन से कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार तबादलों के कारण नीतिगत फैसले और लंबी अवधि की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
हाल ही में सरकार द्वारा 18वें निदेशक का तबादला आदेश जारी किया गया था, लेकिन यह आदेश नियमों के विरुद्ध पाए जाने के कारण सोमवार को निरस्त कर दिया गया। आदेश रद्द होने के बाद एक बार फिर विभाग में असमंजस की स्थिति बन गई है।
सूत्रों के अनुसार, ऑडिट निदेशालय जैसे संवेदनशील विभाग में स्थायित्व और अनुभव बेहद आवश्यक होता है, लेकिन लगातार हो रहे तबादलों से न सिर्फ प्रशासनिक संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि विभाग की निष्पक्षता और कार्यक्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह बार-बार निदेशकों को बदला जाता रहा, तो इसका सीधा असर प्रदेश की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर पड़ेगा। अब देखना होगा कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कब तक ठोस कदम उठाती है और ऑडिट निदेशालय को स्थायी नेतृत्व प्रदान करती है।