रामनगर/अल्मोड़ा: उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं के बीच आपसी गुटबाजी और मनमुटाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। अल्मोड़ा जिले के सल्ट विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक सरकारी बहुउद्देशीय शिविर में बीजेपी विधायक महेश जीना और उन्हीं की पार्टी के जिला पंचायत (जिपं) सदस्य हंसा नेगी के बीच जमकर तीखी नोकझोंक हुई। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है।

बुधवार (18 फरवरी) को सल्ट क्षेत्र की न्याय पंचायत मछोड़ के राजकीय इंटर कॉलेज में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत एक बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देना और मौके पर ही उनकी समस्याओं का समाधान करना था। इसके लिए विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए थे।
चाय-पानी की व्यवस्था से भड़की चिंगारी प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद की शुरुआत शिविर में आने वाले ग्रामीणों के लिए ‘चाय और पानी’ के वितरण को लेकर हुई। जिपं सदस्य हंसा नेगी ने कार्यक्रम स्थल के अंदर ही ग्रामीणों के लिए खान-पान की व्यवस्था की थी। इस व्यवस्था को लेकर सल्ट विधायक महेश जीना और हंसा नेगी के बीच बहस शुरू हो गई, जिसने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया।
विधायक निधि के खर्च पर उठे गंभीर सवाल विवाद केवल चाय-पानी तक सीमित नहीं रहा। गुस्से में आए जिला पंचायत सदस्य हंसा नेगी ने सरेआम विधायक महेश जीना पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी का हवाला देते हुए विधायक निधि से बांटी गई खेल और सांस्कृतिक सामग्री की खरीद में भारी अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए। हंसा नेगी ने दावा किया कि कागजों में:
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दरी की कीमत 10,500 रुपये दर्शाई गई है।
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एक ढोलक की कीमत 8,000 रुपये दिखाई गई है।
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चिमटे की खरीद 2,500 रुपये में दिखाई गई है।
विधायक महेश जीना की सफाई इस पूरे विवाद और वायरल वीडियो पर सल्ट विधायक महेश जीना ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा, “हंसा नेगी ने कार्यक्रम स्थल के ठीक अंदर ही खाने-पीने की व्यवस्था कर दी थी, जिस पर प्रशासन ने आपत्ति जताते हुए इसे बाहर शिफ्ट करने को कहा था। इसी बात पर वे बेवजह भड़क गए।” विधायक ने आरोप लगाया कि यह पूरा हंगामा केवल राजनीतिक लाभ लेने और जनता की सहानुभूति बटोरने के उद्देश्य से किया गया था।
जिपं सदस्य हंसा नेगी का पलटवार दूसरी ओर, हंसा नेगी ने विधायक के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि शिविर में कई ग्रामीण बहुत दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे थे। जनसहयोग से उनके लिए चाय-पानी का इंतजाम किया गया था। उन्होंने कहा, “मैंने लोगों को पहले ही शिविर की जानकारी दी थी और उनके सम्मान में यह व्यवस्था की गई थी, जिसका बिना वजह और गलत तरीके से विरोध किया गया।”
फिलहाल, इस घटनाक्रम के बाद बीजेपी संगठन के अंदर की कलह सार्वजनिक हो गई है और विपक्षी दलों को भी बैठे-बिठाए एक मुद्दा मिल गया है।