देहरादून (12 फरवरी 2026): राजधानी देहरादून के डालनवाला थाना क्षेत्र (तिब्बती मार्केट के पास) में हुए कारोबारी अर्जुन शर्मा हत्याकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। यह सिर्फ एक कत्ल नहीं है, बल्कि एक ही परिवार के भीतर पनपी नफरत, करोड़ों की संपत्ति, और साजिशों की एक खौफनाक दास्तान है। अर्जुन की पत्नी अभिलाषा की तहरीर पर पुलिस ने अर्जुन की सगी मां बीना शर्मा और उनके करीबी विनोद उनियाल समेत चार लोगों के खिलाफ हत्या की नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह पूरा मामला करोड़ों की संपत्ति, एक गैस एजेंसी और रिश्तों में आई खटास के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है:
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अर्जुन के पिता कर्नल रमेश चंद शर्मा 38 साल पहले देश के लिए बलिदान हो गए थे। सरकार ने उनकी पत्नी बीना शर्मा को आजीविका के लिए एक गैस एजेंसी दी थी, जो पिछले 37 सालों से चल रही है।
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इसी पैतृक संपत्ति पर बैंक ऑफ बड़ौदा से 8 करोड़ रुपये का लोन लिया गया था, जिसमें मृतक अर्जुन गारंटर और गवाह था।
‘विनोद उनियाल’ की एंट्री और मां-बेटे में दुश्मनी विवाद का मुख्य केंद्र अर्जुन की मां बीना शर्मा और विनोद उनियाल के बीच की नजदीकियां बताई जा रही हैं। आरोप है कि बीना ने विनोद और उसकी पत्नी संगीता को मोटी रकम दी थी, जिसका अर्जुन लगातार विरोध कर रहा था। अर्जुन का मानना था कि विनोद ने उनकी मां को अपने प्रभाव में लेकर करोड़ों रुपये हड़प लिए हैं।
मुकदमों का लंबा दौर और हाईकोर्ट से सुरक्षा मां-बेटे के बीच की यह दुश्मनी पुलिस थानों से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी थी:
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2024: बीना शर्मा ने अपने ही बेटे अर्जुन के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था।
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2025: अर्जुन ने मां बीना, विनोद और संगीता उनियाल के खिलाफ धोखाधड़ी और संपत्ति के लेनदेन की एफआईआर दर्ज कराई।
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हाईकोर्ट का दखल: बेटे से ‘खतरा’ बताते हुए बीना शर्मा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद बसंत विहार थाने से एक महिला कांस्टेबल उनकी सुरक्षा में तैनात की गई थी।
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ताजा विवाद: हत्या से ठीक 10 दिन पहले (2 फरवरी 2026 को) विनोद ने अर्जुन पर फर्जी चेक हस्ताक्षर का आरोप लगाते हुए बसंत विहार थाने में शिकायत दी थी, जिस पर 3 फरवरी को मुकदमा दर्ज हुआ था।
जीएमएस रोड की संपत्ति का विवाद गैस एजेंसी के अलावा, बीना शर्मा ने जीएमएस (GMS) रोड स्थित एक संपत्ति अजय खन्ना नाम के व्यक्ति को बेच दी थी। अर्जुन ने इस सौदे के खिलाफ सिविल कोर्ट में केस दायर कर ‘स्टे’ (Stay Order) ले लिया था।
पुलिस अब गैस एजेंसी और करोड़ों की संपत्ति के इसी ताने-बाने को सुलझाने में जुटी है, ताकि हत्या के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।