उत्तर प्रदेश

यौन शोषण मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर की अग्रिम जमानत.

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बटुकों के कथित यौन शोषण मामले में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने मंगलवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। इससे पूर्व अदालत ने गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

मामले की पृष्ठभूमि

​यह विवाद तब शुरू हुआ जब आशुतोष ब्रह्मचारी नामक व्यक्ति ने जिला न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर बटुकों के साथ यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाया। इस पर संज्ञान लेते हुए पॉक्सो (POCSO) स्पेशल कोर्ट ने 21 फरवरी को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में 22 मार्च को प्रयागराज के झूंसी थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

​अदालत में दी गई दलीलें

​सुनवाई के दौरान शंकराचार्य के पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार और राजर्षि गुप्ता ने दलील दी कि:

​स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इस मामले में पूरी तरह झूठा फंसाया गया है।

​शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी का स्वयं का आपराधिक इतिहास रहा है और यह मामला द्वेषवश दर्ज कराया गया है।

​दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और शासकीय अधिवक्ता पतंजलि मिश्र ने अग्रिम जमानत का विरोध किया। उन्होंने सीधे हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करने की पोषणीयता (Maintainability) पर भी सवाल उठाए। वहीं, शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता रीना एन सिंह ने अपना पक्ष रखा।

​लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद फैसला

​उल्लेखनीय है कि इस मामले में 17 मार्च को शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने 883 पन्नों का विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल किया था। इससे पहले उन्होंने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों का गहन अध्ययन करने के बाद मंगलवार को शंकराचार्य की गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।

 

 

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