स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा कदम: मिशन निदेशक स्वाति भदौरिया ने हल्द्वानी में तीन प्रमुख परियोजनाओं का निरीक्षण कर की प्रगति समीक्षा

हल्द्वानी: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड की मिशन निदेशक स्वाति भदौरिया ने हल्द्वानी में स्वास्थ्य ढांचे से जुड़ी तीन प्रमुख परियोजनाओं—मातृ-शिशु विंग, 200 बैड युक्त मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल, और क्रिटिकल केयर ब्लॉक—का स्थलीय निरीक्षण किया और उनकी प्रगति की समीक्षा की।
मातृ एवं शिशु विंग (50 शैय्या, महिला चिकित्सालय परिसर)
मिशन निदेशक ने निरीक्षण के दौरान निर्माण की गुणवत्ता, डिज़ाइन और चिकित्सकीय जरूरतों के अनुरूप निर्माण की समीक्षा की। उन्होंने पेयजल निर्माण निगम और चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, जिससे वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, शौचालय, विद्युत व जल आपूर्ति जैसी सभी सुविधाएं उपयोगकर्ता के अनुकूल और सुसज्जित बन सकें।
200 बैड मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल (मोतीनगर)
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के संबंध में स्वाति भदौरिया ने निर्देशित किया कि निर्माण कार्य **एक माह के भीतर** पूर्ण कर विभाग को सौंपा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्य की गति के साथ गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
50 बैड क्रिटिकल केयर ब्लॉक
गंभीर रोगियों और आपात चिकित्सा स्थितियों की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को शीघ्र पूर्ण करने पर बल दिया गया। बिड़कुल निर्माण एजेंसी को सख्त निर्देश दिए गए कि कार्य तय समयसीमा में और उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरा किया जाए।
निरीक्षण में उपस्थित प्रमुख अधिकारी:
डॉ. एच.सी. पंत – मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नैनीताल,डॉ. कुमोद पंत – अपर मुख्य चिकित्सा ,अधिकारी,डॉ. कांता किरण – मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. पवन द्विवेदी – चिकित्सा अधिकारी, सी.एम. तिवारी – सहायक अभियंता, NHM,देवेंद्र नैलवाल – सहायक अभियंता,दीप चंद्र – अवर अभियंता, पेयजल निगम, विजय कुमार – सहायक अभियंता, पेयजल निगम, आकाश भट्ट – परियोजना प्रबंधक, बिड़कुल मो. असीम और विजय बमेठा – इंजीनियर, बिड़कुल
मिशन निदेशक की यह समीक्षा यात्रा न केवल निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में की गई एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह उत्तराखंड सरकार की “स्वस्थ उत्तराखंड, सशक्त उत्तराखंड” की प्रतिबद्धता को सशक्त करने वाला एक ठोस प्रयास भी है।