झूठी लूट की रिपोर्ट का भंडाफोड़: ऑनलाइन गेमिंग की लत में फंसे व्यक्ति ने गढ़ी फर्जी कहानी

रायसी (उधम सिंह नगर) : चौकी रायसी की पुलिस टीम ने अपनी कुशल जांच से एक बड़े धोखाधड़ी के मामले का पर्दाफाश किया है। जो व्यक्ति खुद को लूट का शिकार बताकर पुलिस के पास आया था, वास्तव में उसने ऑनलाइन गेमिंग में पैसे गंवाकर झूठी लूट की घटना रची थी।
21 अगस्त 2025 को टांडा भगमल गुरुद्वारे में सेवा का काम करने वाले धर्मेंद्र नामक व्यक्ति ने चौकी रायसी में आकर सूचना दी कि दरगाहपुर के पास किसी अज्ञात व्यक्ति ने उससे ₹1 लाख नकदी, मोटरसाइकिल और मोबाइल छीन लिया है और मौके से फरार हो गया है। लूट की इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस बल तत्काल घटनास्थल के पास पहुंचा और व्यापक जांच-पड़ताल शुरू की।
पुलिस टीम ने आसपास के लोगों और राहगीरों से विस्तृत पूछताछ की, लेकिन किसी भी व्यक्ति ने ऐसी कोई घटना देखने या सुनने की पुष्टि नहीं की। इससे पुलिस को संदेह हुआ और जांच की दिशा बदलकर शक की सुई खुद को पीड़ित बताने वाले व्यक्ति की ओर घूम गई। पुलिस की अनुभवी टीम ने धर्मेंद्र के प्रारंभिक बयानों में कई विसंगतियां पाईं, जिससे मामले की सच्चाई खंगालने की जरूरत महसूस हुई।
गहन जांच के दौरान चौंकाने वाला सच सामने आया। पुलिस की पड़ताल में पता चला कि धर्मेंद्र ऑनलाइन गेम खेलने का आदी है और उसने इस लत में अपना सारा पैसा गंवा दिया था। और भी गंभीर बात यह सामने आई कि उसने गुरुद्वारा कमेटी से ₹1 लाख का कर्ज लिया था, जिसे वापस करने का समय आ गया था। इस कर्ज से बचने के लिए और अपनी ऑनलाइन गेमिंग की लत को छुपाने के लिए उसने लूट की यह मनगढ़ंत कहानी रची थी।
पुलिस की तीव्र जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण सुराग मिला। पुलिस टीम ने गन्ने के खेत में छुपाकर रखी गई धर्मेंद्र की मोटरसाइकिल को बरामद कर लिया और उसे जब्त कर दिया। यह घटना पुलिस की कुशल जांच और तथ्यों को खंगालने की क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां कुछ ही घंटों में “दूध का दूध और पानी का पानी” हो गया।
झूठी और भ्रामक सूचना देने के लिए पुलिस ने धर्मेंद्र के विरुद्ध पुलिस एक्ट के तहत चालान काटा है। पुलिस अधिकारियों ने उसे कड़ी फटकार लगाते हुए भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की स्पष्ट चेतावनी दी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि झूठी शिकायत दर्ज कराना न केवल कानूनी अपराध है बल्कि यह पुलिस के समय और संसाधनों की बर्बादी भी है, जो वास्तविक अपराधों की रोकथाम में बाधक बनती है।