उत्तराखंडदेहरादून

बीकेटीसी द्वारा शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहन, 10,632 श्रद्धालुओं ने किए दर्शन: हेमंत द्विवेदी

देहरादून, 26 दिसंबर: बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि बीकेटीसी द्वारा शीतकालीन तीर्थयात्रा को योजनाबद्ध तरीके से प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब तक 10,632 श्रद्धालु बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के शीतकालीन पूजा स्थलों में दर्शन कर चुके हैं। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि शीतकालीन यात्रा को गति देने के उद्देश्य से ज्योर्तिमठ और उखीमठ में स्थानीय लोगों, विभिन्न संस्थाओं, हितधारकों और विद्यालयों की सहभागिता से जनजागरण रैलियों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं में शीतकालीन तीर्थाटन के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

बीकेटीसी अध्यक्ष ने जानकारी दी कि बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद योगबदरी पांडुकेश्वर में 321 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि नृसिंह बदरी पांडुकेश्वर में 2,582 तीर्थयात्री पहुंचे। वहीं केदारनाथ और द्वितीय केदार मदमहेश्वर के शीतकालीन पूजा स्थल ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ में अब तक 7,729 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं और यह क्रम लगातार जारी है।

हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन और तीर्थाटन को सुनियोजित ढंग से बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार और मंदिर समिति के संयुक्त प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शीतकालीन पूजा स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि योगबदरी पांडुकेश्वर, नृसिंह मंदिर ज्योर्तिमठ और ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में नियमित पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शीतकालीन यात्रा के दौरान श्रद्धालु धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ रहे हैं।

बीकेटीसी अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य चारधाम यात्रा को वर्षभर सक्रिय रखना है, ताकि धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें। शीतकालीन यात्रा से होटल व्यवसाय, परिवहन, स्थानीय व्यापार और होम-स्टे गतिविधियों को भी मजबूती मिल रही है।

उन्होंने कहा कि मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और मूलभूत व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि अधिक से अधिक संख्या में शीतकालीन पूजा स्थलों में पहुंचकर दर्शन का पुण्य अर्जित करें।

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