मुंबई

BMC चुनाव नतीजे: हार के बाद भी नहीं डिगे ठाकरे बंधु, राज बोले- ‘मराठी अस्मिता के लिए संघर्ष जारी रहेगा’, उद्धव गुट का दावा- ‘लड़ाई अभी बाकी है’

मुंबई: मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनाव के नतीजे आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बयानों का दौर शुरू हो गया है। देश के सबसे अमीर नगर निगम के इन नतीजों में भले ही ठाकरे बंधुओं (राज और उद्धव) को उम्मीद के मुताबिक सफलता न मिली हो, लेकिन उनके तेवर अब भी आक्रामक हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने जहाँ ‘मराठी अस्मिता’ के लिए अपनी जंग जारी रखने का ऐलान किया है, वहीं शिवसेना (यूबीटी) ने साफ कर दिया है कि उनके लिए यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

राज ठाकरे का संदेश: ‘यह धनबल बनाम शिवशक्ति की जंग थी’ मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव परिणामों के बाद एक भावनात्मक और कड़ा संदेश जारी किया। उन्होंने हार से निराश होने के बजाय अपने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया और मराठी मानुष के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

राज ठाकरे ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा, “चाहे चुनाव में उम्मीद के मुताबिक सफलता न मिली हो, लेकिन मराठी भाषा, मराठी लोगों और एक समृद्ध महाराष्ट्र के निर्माण के लिए मेरा संघर्ष हमेशा जारी रहेगा।”

विपक्षी दलों और सत्ता के प्रभाव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “यह चुनाव आसान नहीं था। यह पैसों और सत्ता की असीमित ताकत के खिलाफ ‘शिवशक्ति’ की जंग थी।” उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी पार्टी के लिए खड़े रहने वाले मनसे कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह संघर्ष और योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। साथ ही, उन्होंने मनसे और शिवसेना के सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को जीत की बधाई भी दी।

शिवसेना (UBT): ‘लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई’ दूसरी ओर, उद्धव बालासाहेब ठाकरे वाली शिवसेना (UBT) ने भी नतीजों के बाद अपने समर्थकों में जोश भरने की कोशिश की है। पार्टी की ओर से प्रतिक्रिया आई है कि चुनावी हार-जीत राजनीति का हिस्सा है, लेकिन उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उद्धव गुट ने संकेत दिया है कि वे मुंबई और महाराष्ट्र के हक के लिए सत्ताधारियों से सवाल पूछना और संघर्ष करना जारी रखेंगे।

सियासी मायने बीएमसी चुनाव को हमेशा से ही महाराष्ट्र की राजनीति की दशा और दिशा तय करने वाला माना जाता है। राज ठाकरे का ‘मराठी कार्ड’ और उद्धव ठाकरे की ‘सहानुभूति व विरासत’ की लड़ाई के बीच आई ये प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि आने वाले समय में मुंबई की सड़कों पर राजनीतिक संघर्ष और तेज होगा। राज ठाकरे का यह बयान कि वे मराठी पहचान के लिए लड़ते रहेंगे, संकेत देता है कि मनसे अपने कोर एजेंडे पर और आक्रामक होकर काम करेगी।

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