उत्तराखंडदेहरादून

अटल स्मृति सम्मेलन में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने किया अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन का स्मरण

देहरादून, 30 दिसंबर: कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सोमवार को राजेंद्र नगर स्थित एक निजी वेडिंग प्वाइंट में आयोजित मसूरी विधानसभा क्षेत्र के अटल स्मृति सम्मेलन में प्रतिभाग किया। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का नेतृत्व साहस, संवेदनशीलता और राष्ट्रहित का अद्वितीय संगम था। उन्होंने कहा कि पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण ने भारत को विश्व मंच पर एक सशक्त, आत्मनिर्भर और निर्णायक राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। परीक्षण के बाद अटल जी द्वारा अपनाई गई कूटनीतिक परिपक्वता और स्पष्ट नीति उनके दूरदर्शी नेतृत्व का प्रमाण है।

मंत्री जोशी ने कारगिल युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय सेनाओं ने अद्भुत शौर्य और पराक्रम का परिचय देते हुए देश की सीमाओं की रक्षा की। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय भारत की सैन्य शक्ति, राष्ट्रीय एकता और अटल जी के दृढ़ नेतृत्व का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि पहले जब हमारे जवान सीमा पर शहीद होते थे तो उनके घर केवल राख पहुंचती थी, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी ने इस परंपरा को बदला। उन्होंने शहीदों को सम्मान दिया, उनके बलिदान को राष्ट्र की अस्मिता से जोड़ा और सैनिक सम्मान की भावना को मजबूत किया।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की सेवा में समर्पित सैनिकों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। वन रैंक वन पेंशन की अवधारणा का श्रेय भी स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है, जिससे सैनिकों और पूर्व सैनिकों को न्याय और सम्मान मिला।

उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी मानते थे कि शासन का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि सेवा है। उनके लिए सुशासन केवल नीतियां नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा हुआ विचार था। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और टेलीकॉम क्रांति जैसे ऐतिहासिक निर्णय आज भी भारत के विकास की मजबूत नींव हैं।

मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रबल समर्थक थे। वे असहमति का सम्मान करते थे और संवाद को लोकतंत्र की आत्मा मानते थे। उन्होंने उत्तराखंड राज्य गठन में अटल जी के ऐतिहासिक योगदान को भी स्मरण किया।
उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे—राष्ट्र प्रथम, सुशासन और लोकतंत्र की विचारधारा। उन्होंने सभी से अटल जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित शासन को और मजबूत करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर भाजपा प्रदेश मंत्री नेहा जोशी, नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी, पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा, मंडल अध्यक्ष प्रदीप रावत, रजत अग्रवाल, राजीव गुरुंग, वरिष्ठ नेता आर. एस. परिहार, श्याम अग्रवाल, समीर डोभाल, ज्योति कोटिया, भावना चौधरी, पूनम नौटियाल, निरंजन डोभाल, संध्या थापा, नंदनी शर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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