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मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघ ने ‘संयुक्त कर्मचारी संघ’ को बताया अवैध, मुख्य सचिव को भेजा पत्र

देहरादून/ऋषिकेश/गोपेश्वर/रुद्रप्रयाग : बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघ ने ‘संयुक्त कर्मचारी संघ’ को अवैध और गैर-मान्यता प्राप्त करार देते हुए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन को पत्र भेजकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।

कर्मचारी संघ ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि ‘संयुक्त कर्मचारी संघ’ अस्थायी कर्मचारियों के नाम पर भ्रामक प्रचार कर रहा है और बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल के खिलाफ निराधार बयानबाजी कर रहा है, जो कि एक सोचा-समझा षड्यंत्र है।

मुख्य कार्याधिकारी की कार्यशैली की सराहना

मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघ ने मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल की कार्यप्रणाली की खुलकर प्रशंसा की है। संघ ने कहा कि थपलियाल के नेतृत्व में कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनमें स्क्रीनिंग कमेटी के माध्यम से एसीपी लाभ प्रदान करना, पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करना और वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए विभागीय समितियां गठित करना शामिल है।

संघ ने किया सोशल मीडिया पर हो रहे प्रचार का विरोध

संघ ने सोशल मीडिया पर ‘संयुक्त कर्मचारी संघ’ द्वारा प्रचारित पत्र का विरोध करते हुए इसे मंदिर समिति और संघ की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया। संघ का कहना है कि वर्तमान में न मंदिर समिति का गठन हुआ है और न ही कोई प्रशासक नियुक्त है, ऐसे में प्रशासनिक जिम्मेदारियां मुख्य कार्याधिकारी के हाथ में हैं।

यात्रा तैयारियों में हो रहा व्यवधान

पत्र में यह भी बताया गया कि कपाट खुलने की प्रक्रिया के बीच कुछ कर्मचारी यात्रा व्यवस्थाओं में जानबूझकर बाधा उत्पन्न कर रहे हैं, जिससे समिति की छवि धूमिल हो रही है। इससे पहले भी 27 मार्च को इन्हीं कार्मिकों ने प्रदर्शन किया था।

तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों का भी समर्थन

मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघ ने दावा किया कि पंडा समाज और हक-हकूकधारी भी मुख्य कार्याधिकारी विजय थपलियाल के कार्यों का समर्थन कर रहे हैं।

संघ ने मुख्य सचिव से अपील की है कि अवैध संघ के पत्रों को संज्ञान में न लिया जाए और निजी स्वार्थवश पत्र भेजने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सेवा और वेतन संबंधित जांच कर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि धामों की गरिमा और मंदिर समिति की छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयास रोके जा सकें।

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