उत्तराखंड

चकराता: 70 साल पुराना 3 मंजिला मकान जलकर खाक, मिनटों में राख हुआ लाखों का सामान; देवदार की लकड़ी से बना था आशियाना.

विकासनगर/देहरादून (31 जनवरी 2026): देहरादून जिले के दुर्गम जनजातीय क्षेत्र चकराता के गमरी गांव में शुक्रवार दोपहर बाद एक हृदयविदारक घटना घटी। यहां एक 70 साल से भी ज्यादा पुराना तीन मंजिला मकान भीषण आग की भेंट चढ़ गया। देवदार की लकड़ी से बना यह पारंपरिक मकान देखते ही देखते धू-धू कर जल उठा और कुछ ही देर में राख के ढेर में तब्दील हो गया।

आंखों के सामने उजड़ा आशियाना मकान मालिक जगत सिंह राय ने बताया कि आग इतनी भयानक थी कि उन्हें संभलने का मौका ही नहीं मिला। कोशिश नाकाम: ग्रामीणों ने आग बुझाने का अथक प्रयास किया, लेकिन चूंकि मकान पूरी तरह से सूखी देवदार की लकड़ी का बना था, इसलिए आग ने विकराल रूप ले लिया। घर में रखा गृहस्थी का सारा सामान, कपड़े, अनाज और जेवर जलकर राख हो गए। पीड़ित जगत सिंह ने रूंधे गले से कहा, “अब मेरे पास कुछ भी नहीं बचा, सब कुछ खत्म हो गया।”

क्षेत्रीय पटवारी श्याम सिंह तोमर ने मौके का मुआयना किया। उन्होंने बताया कि इस घटना में कोई जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन आर्थिक नुकसान बहुत बड़ा है। गृह स्वामी के अनुसार करीब 25 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।  मकान में रखी ‘माफी’ (वन विभाग की अनुमति से मिली) की लकड़ी के करीब 40 स्लीपर भी जलकर खाक हो गए, जो मकान मरम्मत या निर्माण के लिए रखे गए थे।

जौनसार की धरोहर हैं ये मकान जौनसार बावर क्षेत्र में देवदार की लकड़ी से बने ये मकान सिर्फ घर नहीं, बल्कि वास्तुकला की धरोहर हैं। ये भूकंप रोधी होते हैं और मौसम के अनुकूल (सर्दियों में गर्म, गर्मियों में ठंडे) रहते हैं। ऐसे एक पुराने और मजबूत मकान का जलना क्षेत्र की सांस्कृतिक क्षति भी है। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

 

 

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