पीपीपी मोड पर संचालित 12 शहरी अस्पतालों में अव्यवस्था; डीएम के औचक निरीक्षण में खुली पोल, अनुबंध निरस्त करने की संस्तुति

देहरादून: जिला प्रशासन ने आज तड़के पीपीपी मोड पर संचालित 12 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (अर्बन पीएचसी) पर औचक छापेमारी कर गंभीर अनियमितताओं का भंडाफोड़ किया। जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में चार प्रशासनिक टीमों—मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, एसडीएम सदर हरी गिरी, उप जिलाधिकारी अपूर्वा सिंह एवं डिप्टी कलेक्टर मुख्यालय—ने सुबह 9 बजे से अलग-अलग स्थानों पर निरीक्षण शुरू किया।
निरीक्षण के दौरान अधिकांश अस्पतालों में चिकित्सक अनुपस्थित मिले। एएनएम, लैब टेक्नीशियन व नर्स की भूतिया एंट्री पाई गई। दवाओं का पर्याप्त स्टॉक नहीं था, सफाई व्यवस्था बेहद खराब और सुरक्षा इंतजाम राम भरोसे पाए गए। बच्चों और महिलाओं के टीका कोल्ड चैन की निरंतरता हेतु जरूरी जनरेटर सेट भी अनुपस्थित मिले। कई केंद्रों में पानी व मरीजों के बैठने की व्यवस्था तक नहीं थी और कुछ केंद्र काल कोठरी जैसी स्थिति में संचालित होते पाए गए।
जिलाधिकारी ने मानक अनुरूप स्टाफ, दवाइयों, सफाई, उपकरण, बैठने की सुविधा, पेयजल आदि की व्यवस्था न मिलने पर अस्पताल प्रबंधन कंपनी अक्षांस/चित्रांश जेवीके प्रा. लि.पर भारी अर्थदंड लगाने और अनुबंध निरस्त करने की संस्तुति मुख्य सचिव को भेजी। तीन माह की बायोमेट्रिक उपस्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।
सीडीओ अभिनव शाह द्वारा चूना भट्टा, अधोईवाला व कारगी पीएचसी के निरीक्षण में चिकित्सक, 4 एएनएम, लैब टेक्नीशियन व प्रबंधक अनुपस्थित पाए गए। आपातकालीन सेवाओं, रेफर मरीजों का रजिस्टर और बायो मेडिकल वेस्ट निपटान प्रणाली में भी गंभीर खामियां मिलीं। टीकाकरण और लैब संचालन में अनियमितताएं पाई गईं।
अस्पतालों में स्टॉक रजिस्टर गड़बड़, सफाई अव्यवस्थित, ऑक्सीजन सिलेंडर व उपकरण संचालित करने में स्टाफ को तकनीकी जानकारी का अभाव, पेयजल के आरओ खराब, दीवारों पर मकड़ी के जाले और गंदगी देखी गई।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दशा में इन अस्पतालों का अनुबंध विस्तारित नहीं किया जाएगा। मुख्य सचिव से अनुबंध निरस्त करने व भारी आर्थिक दंड लगाने की संस्तुति की गई है। डीएम ने कहा कि जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर कठोर कार्रवाई की जाएगी ताकि मरीजों को मानक के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके।