उत्तराखंड

चारधाम यात्रा 2026: केदारनाथ और बदरीनाथ में पहली बार स्थापित होगी ATC प्रणाली

देहरादून | आगामी चारधाम यात्रा 2026 को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में खराब मौसम के कारण होने वाले हवाई हादसों को रोकने के लिए पहली बार केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) प्रणाली स्थापित की जाएगी।

उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के इस निर्णय से अब दुर्गम घाटियों में उड़ने वाले हेलिकॉप्टरों को पल-पल के मौसम की सटीक जानकारी मिल सकेगी।

​मौसम की अनिश्चितता और हवाई सुरक्षा

​केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और हेमकुंड साहिब जैसे क्षेत्र अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित हैं, जहाँ मौसम का मिजाज क्षण भर में बदल जाता है। अक्सर घाटियों में अचानक धुंध छाने या भारी बारिश के कारण हेलिकॉप्टरों की दृश्यता (visibility) कम हो जाती है, जिससे उड़ान भरना जोखिम भरा हो जाता है। अब तक इन क्षेत्रों में पायलटों को जमीनी स्तर से सटीक डेटा मिलने में कठिनाई होती थी, लेकिन नई एटीसी प्रणाली इस कमी को दूर करेगी।

​प्रमुख विशेषताएं और निगरानी

​लाइव ट्रैकिंग: एटीसी सिस्टम के माध्यम से न केवल मौसम का अपडेट मिलेगा, बल्कि हेलिकॉप्टरों की उड़ानों की लाइव ट्रैकिंग भी की जाएगी।

​उड़ान पर नियंत्रण: यदि मौसम में थोड़ा भी बदलाव आता है, तो एटीसी द्वारा तुरंत हेलिकॉप्टरों को उड़ान भरने से रोक दिया जाएगा या उन्हें सुरक्षित स्थान पर लैंड करने के निर्देश दिए जाएंगे।

​पूर्व अनुभव: इससे पहले सिरसी और सहस्त्रधारा हेलीपैड पर एटीएस प्रणाली का सफल संचालन किया गया है, जिसे अब मुख्य धामों तक विस्तारित किया जा रहा है।

​25 फरवरी तक पूरी होगी टेंडर प्रक्रिया

​यूकाडा (UCADA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आशीष चौहान ने बताया कि:

​”प्रदेश में सुरक्षित हेली सेवा के संचालन के लिए एक ‘फुल प्रूफ’ व्यवस्था बनाई जा रही है। केदारनाथ हेली सेवा के लिए टेंडर प्रक्रिया 25 फरवरी 2026 तक पूरी कर ली जाएगी। इसके तुरंत बाद केदारनाथ और बदरीनाथ में एटीसी सिस्टम लगाने का काम शुरू होगा।”

​श्रद्धालुओं के लिए राहत

​हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ और बदरीनाथ पहुँचते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में लोग हेली सेवा का लाभ उठाते हैं। तकनीकी रूप से उन्नत इस प्रणाली के लगने से न केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि उड़ानों के शेड्यूल में भी अधिक स्पष्टता आएगी।

 

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