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देहरादून की सड़कों पर उतरीं ‘साइकिल सखियाँ’: पारंपरिक परिधान में दिया पर्यावरण और सशक्तिकरण का संदेश

देहरादून। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में राजधानी देहरादून की सड़कों पर एक अनूठा संगम देखने को मिला। ‘पहाड़ी पैडलर्स’ की महिला इकाई ‘साइकिल सखी’ द्वारा आयोजित “सायकल्चर – रूट्स विद पैडल्स” राइड में महिलाओं ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आधुनिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का शानदार प्रदर्शन किया।

देहरादून की सड़कों पर उतरीं ‘साइकिल सखियाँ’: पारंपरिक परिधान में दिया पर्यावरण और सशक्तिकरण का संदेश

​7 से 60 वर्ष की महिलाओं ने भरा जोश

​रविवार सुबह 7:20 बजे आईटीएम कॉलेज से शुरू हुई इस राइड में लगभग 40 महिला साइकिल सवारों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन की खास बात यह थी कि 7 साल की नन्हीं बालिकाओं से लेकर 60 साल की बुजुर्ग महिलाओं तक ने इसमें पूरे उत्साह के साथ पैडल मारे। प्रतिभागियों ने आधुनिक स्पोर्ट्स गियर के बजाय साड़ी, सलवार सूट और अन्य पारंपरिक परिधानों में साइकिल चलाकर यह संदेश दिया कि अपनी संस्कृति से जुड़े रहकर भी साहसिक खेलों और सक्रिय जीवनशैली को अपनाया जा सकता है।

​शहर के मुख्य मार्गों से गुजरी राइड

​यह राइड आईटीएम कॉलेज से शुरू होकर बिंदाल पुल और कनॉट प्लेस होते हुए वापस कॉलेज परिसर में सुबह 8:30 बजे संपन्न हुई। राइड के दौरान महिलाओं ने लोगों को जागरूक किया कि छोटी दूरियों के लिए हमेशा मोटर वाहनों की आवश्यकता नहीं होती। साइकिल अपनाकर न केवल ईंधन बचाया जा सकता है, बल्कि प्रदूषण कम करने और स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है।

​अतिथियों ने सराहा अभिनव प्रयास

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सर्वेश उनियाल ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा, “साइकिल सखी का यह प्रयास केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है। यह दिखाता है कि कैसे हम पर्यावरण संरक्षण और अपनी संस्कृति को एक साथ आगे बढ़ा सकते हैं।”

​वहीं, राजपुर के पूर्व कोतवाल लक्ष्मण सिंह बिष्ट ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि समाज की प्रगति के लिए महिलाओं का हर क्षेत्र में आगे आना अनिवार्य है।

​प्रतिभागियों के अनुभव

​जिज्ञासा (साइकिल सवार): “साइकिलिंग ने मेरे दैनिक जीवन को व्यवस्थित कर दिया है। सुबह की राइड से दिनभर ऊर्जा बनी रहती है।”

​रीना बिष्ट (पहली बार शामिल प्रतिभागी): “मुझे अंदाजा नहीं था कि साड़ी में साइकिल चलाना इतना आसान और सुखद होगा। अब मैं नियमित रूप से साइकिल का उपयोग करूंगी।”

​बांदिनी (युवा राइडर): “साइकिल चलाना स्वतंत्रता का अनुभव कराता है। हर महिला को इसे अपनाना चाहिए।”

​भविष्य की राह

​इस आयोजन को डेकाथलॉन देहरादून का भी विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। ‘साइकिल सखी’ समूह द्वारा हर रविवार को ऐसी उद्देश्यपूर्ण राइड्स आयोजित की जाती हैं, ताकि शहर में साइकिल चलाने की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सके। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि छोटे-छोटे बदलाव ही पर्यावरण और समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

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