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Dehradun: अखिल गढ़वाल सभा का 75वां स्थापना दिवस धूम-धाम से संपन्न; हीरक जयंती वर्ष में अक्टूबर में लगेगा 10 दिवसीय भव्य ‘कौथिग’.

देहरादून (10 फरवरी 2026): अखिल गढ़वाल सभा, देहरादून ने आज अपना 75वां स्थापना दिवस (हीरक जयंती वर्ष) आईआरडीटी (IRDT) सभागार में हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया। इस अवसर पर उत्तराखंड की लोक संस्कृति की छटा देखते ही बन रही थी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सभा के संरक्षक और एसआरएचयू (SRHU) के कुलाधिपति डॉ. विजय धस्माना ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया।

Dehradun: 75th Foundation Day of Akhil Garhwal Sabha concluded with much fanfare; A 10-day grand ‘Kauthig’ will be organized in October in the Diamond Jubilee year.

संस्कृति और परंपरा का संगम सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत कर्नल रॉक स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा शिव तांडव स्तोत्र की ओजस्वी प्रस्तुति और टाइनी स्कूल के बच्चों की सरस्वती वंदना से हुई।

लोकगायिका संगीता ढोंडियाल का जादू: उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध लोकगायिका संगीता ढोंडियाल ने अपने सुपरहिट गीत “तैं दिल्ली गुजरात” और “ढोल दमाऊ बजी गेना” गाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

पद्मश्री बसंती बिष्ट की प्रस्तुति: पद्मश्री बसंती बिष्ट ने अपने शिष्यों के साथ पारंपरिक ‘झोड़ा नृत्य’ प्रस्तुत कर समां बांध दिया।

नृत्यों की बहार: गुरु श्रद्धा बछेती के शिष्यों, श्रीमती निर्मला बिष्ट के नेतृत्व में महिला मंच की बहनों (थड़िया-चौंफला), अजबपुर और मोहनपुर क्षेत्र की महिलाओं ने पारंपरिक गढ़वाली नृत्यों की शानदार प्रस्तुति दी। कर्नल रॉक स्कूल के बच्चों द्वारा प्रस्तुत ‘जागर नृत्य’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अक्टूबर में होगा 10 दिवसीय ‘कौथिग’ सभा के अध्यक्ष रोहन धस्माना ने हीरक जयंती वर्ष की बधाई देते हुए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अक्टूबर माह में 10 दिवसीय विशाल ‘कौथिग’ (मेले) का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा पूरे वर्ष समाज हित में विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे। महासचिव गजेंद्र भंडारी ने घोषणा की कि इस वर्ष नवादा स्थित भूमि पर सभा के भवन का विस्तार किया जाएगा।

हर संभव मदद का वादा मुख्य अतिथि डॉ. विजय धस्माना ने अखिल गढ़वाल सभा के कार्यों की सराहना करते हुए एसआरएचयू (SRHU) की ओर से हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम में आलोक मालासी, नीता कुकरेती, कुलानंद घनशाला, भगवान प्रसाद घिल्डियाल और निखिल सकलानी ने भी अपनी कविताओं और गीतों से चार चांद लगाए। इस मौके पर वीरेंद्र असवाल, डॉ. सूर्य प्रकाश भट्ट, पंडित दिवाकर भट्ट समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

 

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