
06 दिसंबर 2025, देहरादून: गिद्धों के संरक्षण को लेकर राजाजी टाइगर रिजर्व ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शुक्रवार को मोतीचूर रेंज में एक इजिप्शियन वल्चर (Egyptian Vulture) को सैटेलाइट आधारित GPS टैग लगाकर प्राकृतिक आवास में पुनः छोड़ दिया गया। यह टैगिंग WWF इंडिया के सहयोग से की गई है।
इजिप्शियन गिद्ध ‘नेचर का सफाईकर्मी’ कहलाता है, लेकिन बीते वर्षों में यह प्रजाति विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई है। ऐसे में यह तकनीकी पहल गिद्धों के मूवमेंट, भोजन की आदतों, आवास, ठहराव स्थलों और माइग्रेशन पैटर्न को समझने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
गिद्ध पर लगाया गया 50 ग्राम वजनी सैटेलाइट टैग
वन्यजीव प्रतिपालक अजय सिंह लिंगवाल ने बताया कि टैग का वजन मात्र 50 ग्राम है और इससे गिद्ध के स्वाभाविक उड़ान या गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
उनके अनुसार, उत्तराखंड वन विभाग और WWF इंडिया वर्ष 2023 से रैप्टर (शिकारी पक्षी) प्रजातियों पर सैटेलाइट टेलीमेट्री आधारित अनुसंधान कर रहे हैं।
पहला चरण पूरा—छह गिद्धों को पहले ही लगाया जा चुका है GPS टैग
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पहले चरण में अब तक 6 गिद्धों को GPS टैग किया गया है।
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अब दूसरे चरण में और गिद्धों को टैग कर मॉनिटरिंग दायरा बढ़ाया जाएगा।
लिंगवाल ने कहा कि यह तकनीकी निगरानी गिद्धों के संरक्षण कार्यक्रम को वैज्ञानिक आधार देगी और राजाजी में बढ़ रही गिद्ध आबादी पर सतत नज़र रखने में मदद करेगी।
राजाजी में गिद्धों की संख्या बढ़ने से बढ़ी उम्मीदें
वन विभाग का कहना है कि राजाजी टाइगर रिजर्व में इजिप्शियन गिद्धों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में बेहतर हुई है।
जीपीएस डेटा से:
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उनके रोज़ाना के उड़ान मार्ग,
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भोजन के स्रोत,
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ठहराव स्थल,
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और संभावित ख़तरों की पहचान संभव हो सकेगी।
इस डेटा का उपयोग भविष्य में अधिक प्रभावी संरक्षण रणनीतियाँ तैयार करने में किया जाएगा।