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देहरादून गुंजन हत्याकांड: भीड़ बनी रही तमाशबीन, एक कदम बढ़ता तो बच सकती थी जान

देहरादून: के मच्छी बाजार इलाके में हुई गुंजन की निर्मम हत्या ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि वारदात के समय मौके पर कई लोग मौजूद थे, लेकिन कोई भी गुंजन की मदद के लिए आगे नहीं आया। अगर किसी ने थोड़ी भी हिम्मत दिखाई होती तो शायद एक निर्दोष जान बच सकती थी।

गुंजन की सहेली पायल, जो घटना की प्रत्यक्ष गवाह रही, आज भी उस भयावह मंजर को याद कर सिहर उठती है। अमर उजाला से बातचीत में उसने बताया कि वारदात वाले दिन सब कुछ सामान्य था। गुंजन रोज की तरह गली में अपनी गाड़ी खड़ी करने आई थी। अक्सर वह पायल से मिलने घर के अंदर भी आती थी, लेकिन उस दिन जल्दी में होने के कारण अंदर नहीं आई।

पायल के अनुसार, कुछ ही देर बाद अचानक बाहर से चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। वह दौड़कर बाहर पहुंची तो देखा कि आकाश नाम का युवक गुंजन पर चापड़ से हमला कर रहा था। आसपास कई लोग खड़े थे, लेकिन कोई भी मदद के लिए आगे नहीं बढ़ा। पायल ने हिम्मत दिखाते हुए आकाश को धक्का देकर गुंजन को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ में हथियार देखकर वह भी डर गई।

बताया जा रहा है कि आरोपी आकाश पहले से ही गुंजन को धमकियां देता आ रहा था। उसने फिल्मी अंदाज में गुंजन से कहा था, “अगर तुम मेरी नहीं हो सकती तो किसी की भी नहीं होने दूंगा।” और आखिरकार उसने अपनी इस धमकी को हकीकत में बदल दिया।

घटना के बाद भी पायल लगातार गुंजन के परिवार के साथ खड़ी रही। वह गुंजन की मां के आंसू पोंछती रही और उसके भाई को ढांढस बंधाती रही। उसकी आंखों में अब भी इस बात का अफसोस साफ नजर आता है कि अगर मौके पर मौजूद लोग थोड़ी भी इंसानियत दिखाते तो शायद आज गुंजन जिंदा होती।

यह घटना समाज के लिए एक गंभीर सवाल खड़ा करती है कि आखिर हम इतने असंवेदनशील क्यों हो गए हैं? किसी की जान बचाने के लिए आगे आना क्या अब हमारी जिम्मेदारी नहीं रही?

फिलहाल पुलिस ने आरोपी आकाश को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। लेकिन गुंजन की मौत ने यह साबित कर दिया कि भीड़ का तमाशबीन बन जाना कभी-कभी किसी की जिंदगी की सबसे बड़ी दुश्मन बन जाता है।

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