देहरादून: आज के डिजिटल दौर में हमारी एक छोटी सी गलती जिंदगी भर की जमा पूंजी पल भर में छीन सकती है। देहरादून में साइबर ठगी का एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां शेयर बाजार में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने के लालच में एक व्यक्ति ने अपने 35 लाख रुपये गंवा दिए। पुलिस और प्रशासन की लगातार अपीलों और जागरूकता अभियानों के बावजूद, शातिर साइबर ठग मासूम लोगों को अपने जाल में फंसा ही ले रहे हैं।

कैसे बिछाया गया ठगी का जाल? पुलिस के अनुसार, अजबपुर खुर्द (देहरादून) के रहने वाले राजाराम भट्ट इस सुनियोजित ठगी का शिकार हुए हैं। यह सिलसिला 7 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ, जब राजाराम ने फेसबुक पर ट्रेडिंग और शेयर बाजार से जुड़ा एक लुभावना विज्ञापन देखा। जानकारी जुटाने के लिए उन्होंने जैसे ही उस लिंक पर क्लिक किया, उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया।
इस ग्रुप में ‘यालिनी गुहा’ नाम की एडमिन ने खुद को ‘स्टैंडर्ड चार्टर्ड सिक्योरिटीज इंडिया लिमिटेड’ की टीम का हिस्सा बताया। पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए उसने बाकायदा सेबी (SEBI) का एक फर्जी पंजीकरण नंबर भी साझा किया।
‘प्रोफेसर’ के टिप्स और फर्जी मुनाफे के स्क्रीनशॉट भरोसा कायम होने के बाद राजाराम को एक ‘एडवांस्ड ग्रुप’ में शामिल किया गया। यहाँ ‘गौरव दुआ’ नाम का एक व्यक्ति खुद को शेयर बाजार का ‘प्रोफेसर’ बताता था और स्टॉक व आईपीओ (IPO) में निवेश के टिप्स देता था। इस ग्रुप में ठगों के अन्य साथी भी जुड़े थे, जो लगातार अपने लाखों के मुनाफे के फर्जी स्क्रीनशॉट साझा करते थे, ताकि राजाराम को लगे कि यह सब असली है।
इन स्क्रीनशॉट्स और झूठे मुनाफे के लालच में आकर राजाराम ने सेबी के फर्जी नियमों के नाम पर गाजियाबाद, पुणे, सिकंदराबाद और विजयवाड़ा स्थित अलग-अलग बैंक खातों में कुल 34 लाख 75 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
पैसे निकालने की बारी आई तो उड़े होश ठगी का असली चेहरा 6 फरवरी 2026 को सामने आया। जब राजाराम ने ऐप के माध्यम से अपने निवेश किए गए पैसों में से 40 लाख रुपये निकालने का अनुरोध (Withdrawal Request) किया, तो उसे रिजेक्ट कर दिया गया। जब उन्होंने ग्रुप एडमिन से इसका कारण पूछा, तो शातिरों ने ‘सर्विस फीस’ के नाम पर 10 लाख 93 हजार रुपये की और मांग की। राजाराम ने जब और पैसे देने से मना किया, तो उन्हें तुरंत ग्रुप से ब्लॉक कर दिया गया। तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि वे एक बहुत बड़े साइबर फर्जीवाड़े का शिकार हो चुके हैं।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच शुरू साइबर क्राइम कंट्रोल के एएसपी कुश मिश्रा ने बताया कि राजाराम भट्ट की तहरीर पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस फिलहाल उन बैंक खातों की गहन जांच कर रही है, जिनमें राजाराम ने अपनी मेहनत की कमाई ट्रांसफर की थी।
एसएसपी एसटीएफ की जनता से अपील: कैसे बचें इस जाल से?
इस घटना को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी जीवनभर की कमाई को इस तरह के जालसाजों से बचाएं। उन्होंने सुरक्षा के कुछ अहम सुझाव दिए हैं:
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लालच में न आएं: पैसा दोगुना करने, भारी डिस्काउंट या फर्जी निवेश के लुभावने विज्ञापनों पर कभी क्लिक न करें।
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फर्जी ग्रुप्स से बचें: टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर निवेश की सलाह देने वाले ‘यूट्यूब लाइक-सब्सक्राइब’ या ‘टास्क’ वाले ऑफर्स से दूर रहें।
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दस्तावेज साझा न करें: बिना पूरी पड़ताल किए किसी भी अनजान कॉलर या सोशल मीडिया मित्र को अपने पैन कार्ड, आधार या बैंक डिटेल्स न दें।
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कस्टमर केयर नंबर: गूगल से सर्च करके किसी भी कस्टमर केयर नंबर पर कॉल न करें, ठग अक्सर वहां अपने फर्जी नंबर डाल कर रखते हैं।
महत्वपूर्ण जानकारी: यदि आपके साथ कोई भी वित्तीय साइबर ठगी होती है, तो घबराएं नहीं। तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।