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Delhi:-दिल्ली में दो हफ्तों में 800 से ज्यादा लोग लापता, महिलाओं और नाबालिगों की संख्या ने बढ़ाई चिंता नई दिल्ली।

देश की राजधानी दिल्ली में साल 2026 की शुरुआत के साथ ही सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 से 15 जनवरी के बीच राजधानी में कुल 800 से अधिक लोग लापता हुए हैं। इनमें से करीब दो-तिहाई महिलाएं और लड़कियां हैं, जबकि बड़ी संख्या में नाबालिगों के गायब होने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

दिल्ली में दो हफ्तों में 800 से ज्यादा लोग लापता, महिलाओं और नाबालिगों की संख्या ने बढ़ाई चिंता
नई दिल्ली।

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, इन 15 दिनों में 509 महिलाएं और लड़कियां लापता हुईं, जबकि 298 पुरुषों के गायब होने की शिकायतें दर्ज की गईं। कुल लापता लोगों में 191 नाबालिग और 616 वयस्क शामिल हैं। इस अवधि में पुलिस 235 लोगों को खोजने में सफल रही है, लेकिन अब भी 572 लोग लापता हैं। औसतन प्रतिदिन लगभग 54 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई, जिनमें से करीब 13 बच्चे प्रतिदिन गायब हुए।
वयस्कों की संख्या सबसे अधिक
लापता मामलों में वयस्कों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। जनवरी के पहले पखवाड़े में 616 वयस्क लापता हुए, जिनमें 363 महिलाएं और 253 पुरुष शामिल हैं। पुलिस ने इनमें से 90 पुरुषों और 91 महिलाओं को ढूंढ लिया है, लेकिन 435 वयस्क अब भी लापता हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इन आंकड़ों को लेकर पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि सिर्फ 15 दिनों में 807 लोगों का लापता होना सामान्य स्थिति नहीं है, खासकर जब इनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि दिल्ली में हर स्तर पर सत्ता होने के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है।
पिछले साल भी गंभीर रहे आंकड़े
साल 2025 में भी दिल्ली में लापता मामलों की संख्या चिंताजनक रही। पूरे वर्ष में 24,508 लोग लापता हुए, जिनमें 14,870 महिलाएं और 9,638 पुरुष थे। पुलिस 15,421 लोगों को तलाशने में सफल रही, लेकिन 9,087 मामलों का अब तक कोई समाधान नहीं हो पाया है।
लगातार बढ़ते लापता मामलों ने राजधानी की कानून-व्यवस्था और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने, त्वरित जांच और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की सख्त जरूरत है।

 

 

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