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दिल्ली–यमुनोत्री हवाई सेवा में देरी, चारधाम के लिए शटल और पिथौरागढ़ उड़ान की तैयारी तेज

देहरादून, 03 मार्च 2026: चारधाम यात्रा को अधिक सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार की तैयारियां जारी हैं। इस कड़ी में केदारनाथ और बदरीनाथ के लिए नियंत्रित शटल सेवाएं शुरू करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है, जबकि दिल्ली से यमुनोत्री के लिए प्रस्तावित हवाई सेवा फिलहाल विलंब का सामना कर रही है।

प्रदेश में हर वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार यातायात दबाव कम करने, दुर्घटनाओं की आशंका घटाने और तीर्थयात्रियों को सुरक्षित व समयबद्ध यात्रा उपलब्ध कराने की दिशा में नई व्यवस्थाएं लागू करने की तैयारी में है।

दिल्ली–यमुनोत्री हेली सेवा अभी लंबित

दिल्ली से उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ हवाईपट्टी तक और वहां से यमुनोत्री धाम के निकट खरसाली व झाला तक हेली सेवाएं शुरू करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि यह योजना अभी धरातल पर नहीं उतर पाई है।

इस रूट पर हेली सेवा संचालन के लिए स्काईहाप कंपनी ने रुचि दिखाई है, लेकिन तकनीकी, संचालन संबंधी औपचारिकताओं और अनुमति प्रक्रियाओं के कारण सेवा प्रारंभ होने में समय लग सकता है।

केदारनाथ–बदरीनाथ के लिए नियंत्रित शटल सेवा

चारधाम यात्रा के दौरान सड़कों पर बढ़ते वाहनों के दबाव को देखते हुए सरकार केदारनाथ और बदरीनाथ के लिए नियंत्रित शटल सेवा शुरू करने की तैयारी में है।

इस व्यवस्था के तहत प्रमुख पार्किंग स्थलों से धामों तक यात्रियों को निर्धारित वाहनों के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। इससे यातायात जाम की समस्या कम होगी और आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य भी तेजी से किए जा सकेंगे।

चार्टर्ड सेवाओं का भी प्रस्ताव

चारों धामों के लिए चार्टर्ड हेली सेवाओं के संचालन पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि सीमित समय वाले श्रद्धालुओं को वैकल्पिक सुविधा मिल सके। इसके लिए निजी कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है।

पिथौरागढ़ उड़ान सेवा की तैयारी

इसके साथ ही पिथौरागढ़ क्षेत्र के लिए नियमित हवाई सेवा को भी सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। सीमांत जनपदों को बेहतर हवाई संपर्क उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार नागरिक उड्डयन क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा दे रही है।

सरकार का लक्ष्य है कि आगामी चारधाम यात्रा सीजन से पहले व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित रूप दिया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और नियंत्रित यात्रा अनुभव मिल सके।

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