
देहरादून: उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। बीते चार वर्षों में केंद्र सरकार से समग्र शिक्षा योजना के तहत ₹2512 करोड़ की भारी भरकम धनराशि मिलने के बावजूद राज्य के 41,500 छात्र-छात्राएं आज भी फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
समग्र शिक्षा योजना का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना, स्मार्ट क्लासरूम विकसित करना, प्रयोगशालाओं की स्थापना करना और छात्रों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना है। लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का प्रभाव अपेक्षित रूप से दिखाई नहीं दे रहा है।
राज्य के कई सरकारी विद्यालयों में अब भी डेस्क-बेंच की भारी कमी बनी हुई है। खासकर पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां छात्र लंबे समय तक फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि उनकी एकाग्रता और स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि फर्नीचर जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव छात्रों के सीखने की क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद इन मूलभूत जरूरतों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई।
यह मामला प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी को उजागर करता है। अब आवश्यकता है कि संबंधित विभाग इस दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाए, ताकि छात्रों को न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें और शिक्षा का स्तर सुधर सके।