धराली:जीपीआर रडार से तलाशी जाएंगी मलबे में दबी जिंदगियां, 480 और लोग सुरक्षित निकाले गए

धराली:उत्तराखंड के आपदाग्रस्त क्षेत्रों में राहत कार्य पांचवें दिन भी जारी है। धराली आपदा में फंसे 480 लोगों को और सुरक्षित निकाला गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को उत्तरकाशी से वापसी के बाद आपदा प्रभावितों के लिए त्वरित राहत पैकेज की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तरकाशी जिले के धराली, पौड़ी जिले के सैंजी और बांकुड़ा गांव में कई मकान पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। इन आपदाग्रस्त क्षेत्रों के प्रभावितों के पुनर्वास के लिए पांच लाख रुपये की तत्काल सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही आपदा में जान गंवाने वाले व्यक्तियों के परिजनों को भी पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिससे इस कठिन घड़ी में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहारा मिल सके।
राहत कार्यों को और मजबूत बनाने के लिए हैदराबाद से जीपीआर रडार मंगवाया गया है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से मलबे के नीचे दबे हुए लोगों को खोजने में सुविधा होगी। यह उपकरण भूमिगत वस्तुओं का पता लगाने में अत्यंत प्रभावी है और बचाव कार्यों की गति को तेज करेगा।
प्रभावितों के पुनर्वास और दीर्घकालिक सहायता के लिए राज्य सरकार ने सचिव राजस्व डॉ. सुरेंद्र नारायण की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान और अपर सचिव वित्त हिमांशु खुराना को सदस्य बनाया गया है। समिति को एक सप्ताह के अंदर प्रभावितों के पुनर्वास का व्यापक पैकेज तैयार करना है, जिसमें विस्थापितों के लिए भूमि का चयन, भवनों, दुकानों और होटलों के पुनर्निर्माण के मानक और स्थायी आजीविका के साधन शामिल हैं।
आपदा के पांचवें दिन एक सकारात्मक खबर यह आई कि हर्षिल और धराली का अंधेरा छंट गया है। उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने युद्धस्तर पर काम करते हुए धराली के आपदाग्रस्त क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाई है। आपदा के बाद शनिवार को पहली बार धराली में रोशनी लौटी है, जिससे स्थानीय लोगों में उम्मीद की किरण जगी है।
इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने विपक्ष को सलाह देते हुए कहा है कि धराली आपदा पर राजनीति न की जाए। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में सभी को सकारात्मकता के साथ आगे आकर प्रभावितों के दुख-दर्द को कम करने में योगदान देना चाहिए। यह समय राजनीतिक बयानबाजी का नहीं बल्कि एकजुट होकर सेवा का है।