उत्तराखंड

उत्तराखंड में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख चुनाव, मतदान शुरू, शाम को मतगणना

उत्तराखंड: प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख पदों के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित इस चुनावी प्रक्रिया में आज ही शाम को मतगणना भी संपन्न हो जाएगी। प्रदेश की कुल 12 जिला पंचायतों में से अध्यक्ष पद और 89 विकासखंडों में ब्लॉक प्रमुख पद के लिए यह निर्णायक दिन है।

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चुनावी स्थिति की बात करें तो इन 12 जिला पंचायतों में से केवल छह जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्यक्ष चुनाव होना है। एक जिले में उच्च न्यायालय की न्यायिक रोक के कारण परिणाम की घोषणा नहीं हो पाएगी। शेष पांच जिलों में पहले से ही निर्विरोध निर्वाचन की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है, जहां उम्मीदवार बिना किसी प्रतिस्पर्धा के विजयी घोषित हो गए हैं।

चमोली जिले से मतदान की शुरुआत का दृश्य देखने को मिला। सबसे पहले देवर खडोरा वार्ड से जिला पंचायत सदस्य जय प्रकाश सिंह पंवार और कोठा वार्ड गैरसैण के सदस्य सुरेश कुमार ने अपना मताधिकार का प्रयोग किया। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार गुरुवार सुबह 10 बजे से जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख पदों के लिए मतदान प्रक्रिया का विधिवत आरंभ हुआ।

मतदान की समयावधि दोपहर तीन बजे तक निर्धारित की गई है। इस चुनाव में एकल संक्रमणीय मतदान प्रणाली का प्रयोग किया जा रहा है, जो एक विशेष चुनावी पद्धति है। इस प्रणाली में मतदाताओं को सभी प्रत्याशियों के लिए अपनी प्राथमिकता के क्रम में वोट डालना होता है। पहली प्राथमिकता से लेकर अंतिम प्राथमिकता तक सभी उम्मीदवारों के नाम के आगे क्रम संख्या अंकित करनी होती है।

मतगणना की प्रक्रिया आज शाम को ही संपन्न होगी। एकल संक्रमणीय प्रणाली के अंतर्गत सर्वाधिक प्राथमिकता प्राप्त करने वाले प्रत्याशी को विजेता घोषित किया जाएगा। यह प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि विजेता को बहुमत का समर्थन प्राप्त हो और वह वास्तव में जनप्रतिनिधियों की पहली पसंद हो।

इस चुनावी प्रक्रिया का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि यह उत्तराखंड के ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन के भविष्य की दिशा तय करेगी। जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख पद ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों की योजना बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आज की यह चुनावी प्रक्रिया प्रदेश के जमीनी स्तर पर नेतृत्व का चेहरा तय करने वाली है और ग्रामीण समुदायों के कल्याण की दिशा निर्धारित करने में सहायक होगी।

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