
देहरादून (30 जनवरी 2026): भूमि विवाद और भाई पर दर्ज मुकदमे के बीच घिरे गदरपुर से भाजपा विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने आज (शुक्रवार) आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। वे देहरादून स्थित पुलिस मुख्यालय पहुंचे और पुलिस महानिदेशक (DGP) दीपम सेठ से मुलाकात की। पांडे ने डीजीपी के सामने साफ मांग रखी कि इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए दोनों पक्षों का नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराया जाए।
‘मुकदमा खत्म कराने नहीं, सच सामने लाने आया हूं’ डीजीपी से मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए अरविंद पांडे ने कहा कि वे जांच से भागने वालों में से नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैं डीजीपी से मिलकर मुकदमा खत्म कराने की सिफारिश करने नहीं आया था। मेरी मांग है कि वादी और मेरे परिजनों (आरोपियों) का नार्को टेस्ट हो। अगर मेरा कोई परिजन दोषी साबित होता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई हो। लेकिन जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक तो मुकदमे के हिसाब से मैं और मेरा परिवार ‘भू-माफिया’ ही हैं।”
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बीती 20 जनवरी को बाजपुर पुलिस ने अरविंद पांडे के भाई देवानंद पांडे समेत चार लोगों के खिलाफ जमीन कब्जाने और फर्जीवाड़ा करने का मुकदमा दर्ज किया था , गांव बहादुरगंज निवासी संजय बंसल ने आरोप लगाया था कि मुंडिया पिस्तौर में उनकी जमीन है, जिसे हड़पने के लिए आरोपियों ने फर्जी किरायानामा बनाया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब प्राधिकरण के नोटिस के बाद वे मौके पर गए, तो विधायक के भाई ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और कागजात फेंक दिए।
राजनीतिक रंजिश और ‘साजिश’ का आरोप अरविंद पांडे ने इस पूरे प्रकरण को अपने खिलाफ रची गई एक ‘सोची-समझी राजनीतिक साजिश’ करार दिया है। गौरतलब है कि धामी सरकार की दूसरी पारी में पूर्व मंत्री अरविंद पांडे हाशिए पर चल रहे हैं। उधम सिंह नगर प्रशासन के खिलाफ वे कई बार अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा की आंतरिक कलह से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के वक्त पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत कई नेताओं ने पांडे के साथ खड़े होने का संकेत दिया था, जिससे संगठन में हलचल तेज है।