
देहरादून/नई दिल्ली (1 फरवरी 2026): केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में अपना लगातार 9वां बजट पेश करते हुए देवभूमि उत्तराखंड के लिए एक बड़ी सौगात दी है। बजट 2026-27 में पहाड़ के पर्यटन को नई ऊंचाइयां देने के लिए ‘इकोलॉजिकल सस्टेनेबल माउंटेन ट्रेल्स’ (पर्यावरण के अनुकूल पहाड़ी रास्ते) विकसित करने का ऐलान किया गया है।
वित्त मंत्री का विजन: दुनिया देखेगी उत्तराखंड का रोमांच वित्त मंत्री ने अपने भाषण में विशेष रूप से उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, पूर्वी घाट की अराकू घाटी और पश्चिमी घाट की पोथिगई मलाई का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में वर्ल्ड क्लास ट्रेकिंग और हाइकिंग अनुभव के लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। केंद्र सरकार का मानना है कि इन राज्यों में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें अब तक पूरी तरह नहीं तराशा गया है।
![]()
सीएम धामी बोले- पलायन रुकेगा, रोजगार बढ़ेगा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय बजट को ‘विकसित भारत-2047’ का सर्वस्पर्शी बजट बताया है।
-
प्रतिक्रिया: सीएम ने कहा, “उत्तराखंड में ट्रेकिंग ट्रेल्स के विकास की घोषणा एक दूरदर्शी पहल है। इससे स्थानीय लोगों की आजीविका मजबूत होगी और युवाओं को घर के पास ही रोजगार मिलेगा, जिससे पलायन रोकने में मदद मिलेगी।”
100 करोड़ का है मौजूदा कारोबार इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन (IMF) के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड में अभी भी ट्रेकिंग का करीब 100 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार है। राज्य में 6 दर्जन से ज्यादा विश्व स्तरीय रूट हैं। फूलों की घाटी, रूपकुंड, चोपता-चंद्रशिला, हर की दून, दयारा बुग्याल, पिंडारी ग्लेशियर और केदारताल जैसे स्थान दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
बजट में घोषणा के साथ ही सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। आंकड़ों के मुताबिक:
-
हिमालयी राज्यों में पिछले 5 साल में ट्रेकिंग के दौरान करीब 150 लोगों की जान गई है।
-
उत्तराखंड में ट्रेकिंग के लिए अभी तक कोई ठोस नियमावली (SOP) नहीं है।
-
4500 मीटर तक की ऊंचाई को ट्रेकिंग और उससे ऊपर को पर्वतारोहण माना जाता है, लेकिन सरकार के पास हादसों का सटीक डेटाबेस मौजूद नहीं है।